लखनऊ में सैकड़ों साल पुराना कुआं ध्वस्त, लेसा पर लगा आरोप; लोगों में आक्रोश

डालीगंज क्षेत्र में सैकड़ों साल पुराने कुएं को तोड़े जाने का आरोप; धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा था स्थल

लखनऊ के लखनऊ के डालीगंज क्षेत्र में सैकड़ों वर्ष पुराने ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के कुएं को ध्वस्त करने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों ने लेसा विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के डालीगंज क्षेत्र में एक पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व वाले कुएं को ध्वस्त किए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी और आक्रोश व्याप्त है।

सैकड़ों साल पुराना था कुआं

स्थानीय निवासियों के अनुसार, डालीगंज मनकामेश्वर वार्ड के पास अयोध्या मार्ग और सीतापुर ब्रांच रोड के बीच स्थित यह कुआं कई दशकों से लोगों की प्यास बुझाने का प्रमुख स्रोत रहा था। यह न केवल आमजन बल्कि पशुओं के लिए भी जल का महत्वपूर्ण साधन था।

धार्मिक परंपराओं से जुड़ा था स्थल

बताया जा रहा है कि यह कुआं हिंदू धार्मिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ था। विवाह जैसे मांगलिक कार्यों में “कुआं पूजन” की परंपरा यहां निभाई जाती थी, जिससे इसकी सांस्कृतिक अहमियत और बढ़ जाती थी।

लेसा पर बिना अनुमति तोड़ने का आरोप

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि लेसा (LESA) विभाग द्वारा बिना किसी अनुमति के कुछ महीने पहले इस कुएं को ध्वस्त कर दिया गया। लोगों का कहना है कि इस कार्रवाई से उनकी भावनाएं आहत हुई हैं।

लालजी टंडन के निर्देश पर हुआ था पुनर्निर्माण

स्थानीय लोगों के अनुसार, पूर्व नगर विकास मंत्री लालजी टंडन के निर्देश पर इस कुएं का पहले जीर्णोद्धार कर “इंदारा कुआं” के रूप में विकसित किया गया था, जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों को लाभ मिलता था।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को दी सूचना

मामले की जानकारी पार्षद प्रतिनिधि सुदर्शन कटियार को दी गई, जिन्होंने मौके पर पहुंचकर घटना पर दुख जताया। साथ ही नगर निगम के अधिकारियों और अभियंताओं को भी बुलाकर स्थल का निरीक्षण कराया गया।

स्थानीय लोगों की मांग

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि:

  • धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की पहचान कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
  • बिना अनुमति ऐसे स्थलों को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई हो
  • सरकार इस मामले का संज्ञान लेकर उचित कदम उठाए

डालीगंज का यह मामला केवल एक कुएं के ध्वस्तीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक आस्था से जुड़ा मुद्दा बन गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है और स्थानीय लोगों की भावनाओं को किस तरह संतुलित करता है।

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