दशाश्वमेध घाट पर योग का महाकुंभ, 850 लोगों ने किया सामूहिक योगाभ्यास

12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की उल्टी गिनती शुरू, अनुलोम-विलोम, कपालभाति और प्राणायाम से गूंजा संगम तट

प्रयागराज के ऐतिहासिक दशाश्वमेध घाट पर 12वें राष्ट्रीय योग दिवस के काउंटडाउन कार्यक्रम में 850 लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास किया। गंगा तट पर अनुलोम-विलोम, कपालभाति और प्राणायाम के माध्यम से स्वास्थ्य, अध्यात्म और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज के ऐतिहासिक दशाश्वमेध घाट पर बुधवार सुबह योग, अध्यात्म और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में “गंगोत्री से गंगासागर” यात्रा के तहत आयोजित योग काउंटडाउन कार्यक्रम में करीब 850 लोगों ने एक साथ योगाभ्यास कर स्वस्थ और निरोगी जीवन का संदेश दिया।

सुबह की ताजगी, गंगा की लहरों की मधुर ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित कार्यक्रम में अनुलोम-विलोम, कपालभाति, प्राणायाम सहित विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास कराया गया। पूरे घाट का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से सराबोर नजर आया।

दीप प्रज्ज्वलन और हवन-पूजन से हुआ शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश की आयुष महानिदेशक Chaitra V ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। भगवान धन्वंतरि और महर्षि पतंजलि के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया तथा हवन-पूजन के माध्यम से वातावरण को सकारात्मक ऊर्जा से भरने का प्रयास किया गया।

इसके बाद उपस्थित लोगों ने कॉमन योग प्रोटोकॉल (CYP) के तहत सामूहिक योगाभ्यास किया। योग प्रशिक्षकों के निर्देशन में प्रतिभागियों ने विभिन्न आसनों और प्राणायाम का अभ्यास कर शरीर और मन को संतुलित रखने का संदेश दिया।

गंगोत्री से गंगासागर तक योग और संस्कृति का संदेश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए चैत्रा वी. ने कहा कि “गंगोत्री से गंगासागर” यात्रा केवल योग कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने वाला अभियान है।

उन्होंने बताया कि यह यात्रा हरिद्वार, वाराणसी, प्रयागराज, पटना और हुगली सहित कई प्रमुख स्थलों से गुजरते हुए गंगासागर तक पहुंचेगी। इसका उद्देश्य लोगों को योग, स्वास्थ्य और प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

समाज के हर वर्ग की रही भागीदारी

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान, आयुष मंत्रालय, रेलवे यात्री सुरक्षा एवं सुविधाएं एसोसिएशन तथा राष्ट्रीय आयुष मिशन (उत्तर प्रदेश) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

बुजुर्गों, युवाओं, महिलाओं और विद्यार्थियों ने एक साथ योगाभ्यास कर योग को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों ने नियमित योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का भी संकल्प लिया।

स्वास्थ्य, अध्यात्म और संस्कृति का अनूठा संगम

कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों के चेहरों पर आत्मविश्वास, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की झलक दिखाई दी। गंगा तट पर आयोजित यह आयोजन केवल योगाभ्यास तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और आधुनिक स्वास्थ्य चेतना के संगम का प्रतीक बन गया।

दशाश्वमेध घाट से उठी योग और स्वास्थ्य की यह अलख अब अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य आयोजन तक जन-जन को प्रेरित करने का कार्य करेगी।

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