“संसद विशेष सत्र में मल्लिकार्जुन खड़गे ने महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का विरोध करते हुए कहा कि विपक्ष इसे हराएगा। जानें पूरी बहस, बयान और राजनीतिक असर।“
नई दिल्ली। संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पष्ट कहा है कि विपक्ष इस बिल के खिलाफ वोट करेगा और इसे हराने की कोशिश करेगा।
संसद में जारी बहस के बीच खड़गे का यह बयान विपक्ष की रणनीति को साफ तौर पर सामने लाता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर एकजुट हैं और लोकसभा में भी इस विधेयक का कड़ा विरोध किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी आज सदन में इस मुद्दे पर अपनी बात रख सकते हैं।
केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण अधिनियम 2023 में संशोधन के लिए नया विधेयक पेश किया है, जिस पर आज शाम वोटिंग प्रस्तावित है। इससे पहले सरकार ने इस कानून को 16 अप्रैल 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि, इसे लागू करने की वास्तविक प्रक्रिया जनगणना और परिसीमन से जोड़ी गई है, जिस पर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने परिसीमन विधेयक को “राजनीतिक शक्ति में बड़ा बदलाव” बताया और कहा कि इस पर जल्दबाजी में फैसला नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे “राजनीतिक नोटबंदी” जैसा कदम बताते हुए व्यापक चर्चा की मांग की।
वहीं मनीष तिवारी ने “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य” के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि परिसीमन से राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ सकता है।
दूसरी ओर, सरकार की ओर से किरन रिजिजू ने कहा कि यह पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया है और इसे गलत तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून को लागू करने और संशोधन लाने की प्रक्रिया तकनीकी कारणों से जरूरी है।
संसद में भाजपा सांसद कंगना रनौत ने भी महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
क्या है पूरा मामला?
सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है। लेकिन इसे लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया को जरूरी बताया गया है, जिससे इसके लागू होने में देरी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर संसद में सत्ता और विपक्ष के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा है। अब सबकी नजरें आज होने वाली वोटिंग पर टिकी हैं, जो इस बहुचर्चित विधेयक का भविष्य तय करेगी।
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