“LPG सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद सरकार ने बताया कि घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई लागत 1600 रुपये से अधिक पहुंच गई है। हर सिलेंडर पर करीब 700 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है। जानिए LPG Price Hike, उज्ज्वला योजना, सब्सिडी और अंतरराष्ट्रीय बाजार का पूरा असर।“
नई दिल्ली। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की ताजा बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार ने इसका कारण स्पष्ट करते हुए कहा है कि 14.2 किलोग्राम वाले एक घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद आम उपभोक्ताओं को यह गैस काफी कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों और सरकार को प्रति सिलेंडर लगभग 700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
फरवरी से 46 प्रतिशत बढ़ी अंतरराष्ट्रीय कीमत
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, वेस्ट एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल आया है। फरवरी 2026 में सऊदी अरामको की एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट कीमत 542.50 डॉलर प्रति टन थी, जो अप्रैल में बढ़कर 775 डॉलर प्रति टन और जून में 790 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई। फरवरी के मुकाबले यह लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि है।
मंत्रालय ने बताया कि प्रोपेन और ब्यूटेन दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिससे आयातित एलपीजी की लागत बढ़ गई और घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति लागत 1,600 रुपये से अधिक हो गई।
दिल्ली में अब 942 रुपये का हुआ सिलेंडर
सरकार ने 7 जून से घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 29 रुपये बढ़ा दिए हैं। इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। यह पिछले तीन महीनों में दूसरी बढ़ोतरी है।
हालांकि सरकार का कहना है कि बाजार आधारित वास्तविक लागत की तुलना में उपभोक्ता अब भी लगभग 700 रुपये कम भुगतान कर रहे हैं।
उज्ज्वला लाभार्थियों को राहत जारी
सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलती रहेगी। इस तरह उज्ज्वला परिवारों को प्रभावी रूप से एक सिलेंडर के लिए लगभग 642 रुपये ही खर्च करने पड़ते हैं। मंत्रालय के अनुसार यह अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य की तुलना में करीब 60 प्रतिशत कम है।
देशभर में 10 करोड़ से अधिक उज्ज्वला कनेक्शन इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।
60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंची अंडर-रिकवरी
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक घरेलू एलपीजी पर लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर यानी अंडर-रिकवरी वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक लगभग 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस बोझ को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने तेल विपणन कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दी है।
मंत्रालय का कहना है कि वर्तमान में भी तेल कंपनियां प्रत्येक घरेलू सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान झेल रही हैं।
होर्मुज संकट के बावजूद नहीं हुई सप्लाई में कमी
सरकार ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखा। आयात में आने वाली चुनौतियों की भरपाई के लिए घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई। इसके अलावा अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से भी अतिरिक्त आपूर्ति की व्यवस्था की गई।
साथ ही घरेलू गैस के व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए ओटीपी आधारित डिलीवरी सत्यापन और अन्य निगरानी उपायों को भी मजबूत किया गया है।
पड़ोसी देशों से अब भी सस्ता भारतीय सिलेंडर
केंद्र सरकार ने कहा कि ताजा मूल्य वृद्धि के बाद भी भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत कई पड़ोसी देशों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कम है। मंत्रालय के अनुसार पाकिस्तान में घरेलू सिलेंडर की कीमत लगभग 1,046 रुपये, नेपाल में 1,207 रुपये, बांग्लादेश में 1,225 रुपये और श्रीलंका में 1,241 रुपये के बराबर है। वहीं अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में यह कीमत भारत से काफी अधिक है।
क्या है सरकार का तर्क?
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से बढ़ती कीमतों का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। यदि घरेलू एलपीजी को पूरी तरह बाजार मूल्य पर बेचा जाए तो एक सिलेंडर की कीमत 1,600 रुपये से अधिक हो सकती है। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था के तहत सरकार और तेल कंपनियां उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों का बड़ा हिस्सा स्वयं वहन कर रही हैं।
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