बाल संरक्षण व वन स्टॉप सेंटर सेवाओं पर पुलिस की विशेष कार्यशाला, 39 कर्मियों को दिया गया प्रशिक्षण

संवेदनशील मामलों में बेहतर पुलिसिंग और पीड़ित सहायता तंत्र को मजबूत करने पर जोर

लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने बाल संरक्षण और वन स्टॉप सेंटर सेवाओं पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की, जिसमें 39 पुलिस कर्मियों को संवेदनशील मामलों और पीड़ित सहायता के लिए प्रशिक्षित किया गया।

हाइलाइट्स:

  • बाल संरक्षण व वन स्टॉप सेंटर सेवाओं पर विशेष प्रशिक्षण
  • 39 पुलिसकर्मियों ने कार्यशाला में लिया हिस्सा
  • JJ Act, CWPO और CWC की भूमिका पर विस्तृत जानकारी
  • पीड़ित सहायता के लिए विभागीय समन्वय पर जोर
  • संवेदनशील मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की सलाह

लखनऊ। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ द्वारा बाल संरक्षण एवं वन स्टॉप सेंटर सेवाओं को लेकर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। रिजर्व पुलिस लाइन स्थित संगोष्ठी सदन में आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पीड़ित बच्चों और महिलाओं की सहायता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) बबलू कुमार तथा पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अमित कुमावत के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यशाला का संचालन सहायक पुलिस आयुक्त (महिला अपराध/ट्रेनिंग सेल) सौम्या पाण्डेय के पर्यवेक्षण में संपन्न कराया गया।

इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पुलिस कर्मियों को अपराध से पीड़ित बालकों एवं महिलाओं को उपलब्ध सुविधाओं के प्रति जागरूक और दक्ष बनाना था, ताकि विभिन्न विभागों के समन्वय से पीड़ितों को त्वरित, प्रभावी और संवेदनशील सहायता मिल सके।

कार्यक्रम में कमिश्नरेट के विभिन्न थाना क्षेत्रों से चयनित 39 पुलिस अधिकारी व कर्मचारी शामिल हुए। प्रशिक्षण सत्र विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा संचालित किए गए, जिनमें तकनीकी और व्यवहारिक दोनों पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान बाल संरक्षण अधिकारी सूर्यकांत चौरसिया ने किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) के प्रावधानों, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWPO) की जिम्मेदारियों और बाल अपचारियों से संबंधित विधिक प्रक्रियाओं पर विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) की भूमिका, सोशल बैकग्राउंड रिपोर्ट के महत्व तथा बाल संरक्षण तंत्र के विभिन्न पहलुओं को भी समझाया गया।

कार्यशाला में वन स्टॉप सेंटर के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं को मिलने वाली चिकित्सा, कानूनी, मनोवैज्ञानिक सहायता और अस्थायी आश्रय जैसी सुविधाओं की जानकारी साझा की गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि संवेदनशील मामलों में पुलिसकर्मी सहानुभूतिपूर्ण और जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं।

प्रशिक्षण के दौरान केस स्टडी और उदाहरणों के जरिए यह बताया गया कि पुलिस, बाल संरक्षण इकाइयों और अन्य विभागों के समन्वित प्रयासों से पीड़ितों को बेहतर सहायता प्रदान की जा सकती है। प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने के लिए मार्गदर्शन भी दिया गया।

पुलिस कमिश्नरेट ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी जारी रहेंगे, ताकि पुलिसिंग को और अधिक संवेदनशील, प्रभावी और जनोन्मुख बनाया जा सके।

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