स्मार्ट बिजली मीटर पर बढ़ा विवाद, खपत में 84% वृद्धि से उपभोक्ता और विभाग दोनों परेशान

पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम क्षेत्र में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के बाद बढ़ी बिजली खपत; जांच की मांग तेज, नियामक आयोग से मांगा गया जवाब

Smart Electricity Meter Consumption Increase: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर लगाने के बाद बिजली खपत में 84% वृद्धि का मामला सामने आया है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम क्षेत्र में बढ़ी खपत को लेकर जांच की मांग उठी है। उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग से जवाब मांगा।

लखनऊ। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर लगाए जाने के बाद बिजली खपत में अप्रत्याशित वृद्धि ने उपभोक्ताओं के साथ-साथ विद्युत विभाग की चिंता भी बढ़ा दी है। नए स्मार्ट मीटर लगने के बाद औसत बिजली खपत में लगभग 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज होने पर अब पूरे मामले की जांच की मांग उठने लगी है।

जानकारी के अनुसार, स्मार्ट मीटर लागू होने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिल और खपत आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया है। इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने जांच की मांग करते हुए सवाल उठाए हैं कि क्या स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत से अधिक रीडिंग दर्ज कर रहे हैं।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि बिजली दरों की सुनवाई के दौरान स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद मामले में जवाब देने के लिए विद्युत नियामक आयोग ने निगम से स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि निगम ने स्पष्ट जवाब देने के बजाय आंतरिक रिपोर्ट मंगाने की बात कही है।

आंकड़ों के अनुसार, पश्चिमांचल निगम क्षेत्र में 27 जनवरी तक लगभग 11.91 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से करीब 9.56 लाख मीटर प्रीपेड मोड में संचालित हो रहे हैं। परिषद का दावा है कि जिन उपभोक्ताओं के यहां पहले पारंपरिक मीटर लगे थे, उनकी औसत मासिक खपत जुलाई से दिसंबर 2024 के बीच 118.94 यूनिट थी। वहीं स्मार्ट मीटर लगने के बाद जुलाई से दिसंबर 2025 के बीच यह खपत बढ़कर 219.15 यूनिट तक पहुंच गई।

बढ़ती खपत के आंकड़ों ने बिजली विभाग और उपभोक्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उनकी जीवनशैली या उपकरणों के उपयोग में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, फिर भी बिजली बिल और खपत में भारी वृद्धि दिखाई दे रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में खपत बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो तकनीकी स्तर पर मीटरों की जांच आवश्यक है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि समस्या मीटर की रीडिंग प्रणाली में है या खपत दर्ज करने के तरीके में।

मामले को लेकर अब विद्युत नियामक आयोग की भूमिका अहम मानी जा रही है। आयोग की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली में कोई तकनीकी खामी है या बिजली खपत में वास्तविक बढ़ोतरी हुई है।

इस बीच, स्मार्ट मीटर परियोजना को लेकर प्रदेशभर में बहस तेज हो गई है। कई उपभोक्ता संगठन पहले भी मीटरों की सटीकता और बिलिंग प्रक्रिया पर सवाल उठा चुके हैं। अब खपत में दर्ज बड़ी वृद्धि ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है।

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