“इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर और एटा पुलिस पर सख्ती दिखाते हुए DGP से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा। याची ने पुलिस उत्पीड़न और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।“
प्रयागराज । इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गौतमबुद्धनगर और एटा पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि वह स्पष्ट करें कि पुलिस द्वारा याचिकाकर्ता को परेशान किए जाने के आरोपों पर उनका क्या रुख है।
क्या है मामला?
यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने गौतमबुद्धनगर (ग्रेटर नोएडा) के बीटा-2 थाना क्षेत्र की निवासी संध्या की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि गौतमबुद्धनगर और एटा पुलिस बिना किसी ठोस कारण के उसे लगातार परेशान कर रही है।
कोर्ट का निर्देश
हाई कोर्ट ने याचिका और पूरक हलफनामे की प्रति सीजेएम, लखनऊ के माध्यम से DGP को भेजने का निर्देश दिया है, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा सके।
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि DGP व्यक्तिगत रूप से हलफनामा दाखिल कर बताएंगे कि पुलिस के इस रवैये पर उनका क्या कहना है।
एफआईआर की निष्पक्ष जांच की मांग
याचिका में दर्ज एफआईआर की निष्पक्ष विवेचना कराने की मांग की गई है। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
अगली सुनवाई 30 अप्रैल को
मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है। तब तक DGP को अपनी जांच रिपोर्ट और व्यक्तिगत हलफनामा कोर्ट में पेश करना होगा।
हाई कोर्ट के इस सख्त रुख से साफ है कि न्यायपालिका पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए गंभीर है। आने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है।
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