“CM योगी ने लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र को क्षेत्रीय मौसम केंद्र बनने पर कहा कि मौसम की सटीक जानकारी से किसानों की फसलें बचेंगी और आपदाओं में जनहानि कम होगी। जलवायु परिवर्तन, कृषि, आपदा प्रबंधन और जैव विविधता संरक्षण पर मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण बातें कहीं।“
लखनऊ। लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन को नई मजबूती मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र को क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र में परिवर्तित किए जाने को प्रदेश के किसानों, आपदा प्रबंधन तंत्र और आम जनता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि मौसम की सटीक और समय पर जानकारी न केवल फसलों को सुरक्षित रखने में मदद करेगी, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जनहानि को भी कम करेगी।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में मौसम विभाग की कार्यप्रणाली में व्यापक सुधार हुआ है। आज मौसम संबंधी पूर्वानुमान पहले की तुलना में कहीं अधिक सटीक हो चुके हैं, जिसका लाभ सीधे किसानों और आम नागरिकों को मिल रहा है।
उन्होंने सहारनपुर स्थित मां शाकंभरी देवी मंदिर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि भारी वर्षा के दौरान समय पर जारी अलर्ट के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सका, जिससे संभावित जनहानि टल गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम चक्र प्रभावित हुआ है और इसका असर कृषि पर भी पड़ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में खाद्यान्न संकट जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति के अंधाधुंध दोहन का परिणाम अब पूरी दुनिया महसूस कर रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है। देश का लगभग हर 16वां-17वां नागरिक उत्तर प्रदेश का निवासी है। प्रदेश के पास देश की कुल कृषि योग्य भूमि का लगभग 11 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि यहां से देश के करीब 21 प्रतिशत खाद्यान्न का उत्पादन होता है। ऐसे में किसानों को समय पर मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने मौसम संबंधी और अधिक सटीक जानकारी के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से राज्य के लिए अलग उपग्रह की संभावना पर भी चर्चा की है। उन्होंने बिजली गिरने जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाली मौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार राहत सहायता और मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के माध्यम से प्रभावित परिवारों को सहायता प्रदान कर रही है।
उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल तक मौसम संबंधी सूचनाओं और चेतावनियों का लाभ तेजी से मिलेगा, जिससे बुआई, कटाई और आपदा प्रबंधन की योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सकेगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने “योगी की कलम से” पहल के तहत प्रदेशवासियों को जैव विविधता संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने, पर्यावरणीय अनुभवों को साझा करने और जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
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