“ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की पुरुष हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में 190 किलोग्राम वजन उठाकर झंडू कुमार ने कांस्य पदक जीता। बिहार के नालंदा के रहने वाले झंडू ने भारत का पदक खाता खोलते हुए प्रेरणादायक प्रदर्शन किया।“
नई दिल्ली/ग्लासगो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने अपने पदकों का खाता खोल दिया है। बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने पुरुष हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। ग्लासगो (स्कॉटलैंड) में आयोजित प्रतियोगिता में 28 वर्षीय झंडू कुमार ने 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाकर भारत को पहला पदक दिलाया और देश का गौरव बढ़ाया।
190 किलोग्राम वजन उठाकर जीता कांस्य पदक
झंडू कुमार ने प्रतियोगिता के दौरान अपने पहले प्रयास में 181 किलोग्राम और दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। तीसरे प्रयास में उन्होंने 196 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन इसमें सफल नहीं हो सके। कुल 130.9 अंक हासिल कर उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया।
इस स्पर्धा में नाइजीरिया के इदरीस रिलुवान ने 132.8 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 131 अंक के साथ रजत पदक हासिल किया।
भारत के अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन
पुरुष हेवीवेट वर्ग में भारत के एक अन्य खिलाड़ी सुधीर ने 114.1 अंक अर्जित किए और छठे स्थान पर रहे।
वहीं पुरुष लाइटवेट वर्ग में अशोक मलिक बेहद मामूली अंतर से पदक से चूक गए और चौथे स्थान पर रहे। उन्होंने 143.8 अंक हासिल किए।
इस स्पर्धा में इंग्लैंड के मार्क स्वान ने स्वर्ण, नाइजीरिया के रोलैंड एजुरुइके ने रजत और मलेशिया के बोनी बुनयाउ गुस्तिन ने कांस्य पदक जीता।
भारत के परमजीत कुमार सातवें स्थान पर रहे।
महिला स्पर्धाओं में कस्तूरी राजामणि, जसप्रीत कौर और सुमन देवी पदक जीतने में सफल नहीं हो सकीं।
संघर्षों से भरा रहा झंडू कुमार का सफर
झंडू कुमार की सफलता का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। बिहार के नालंदा जिले के हरनौत गांव में जन्मे झंडू कुमार बचपन में पोलियो से प्रभावित हो गए थे। महज पांच वर्ष की उम्र में पोलियो होने के बाद उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने अपने माता-पिता के साथ सब्जियां बेचकर घर चलाने में मदद की। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने खेल का सपना नहीं छोड़ा।
सब्जी बेचने से कॉमनवेल्थ पदक तक का सफर
झंडू कुमार ने वर्ष 2010 से 2012 के बीच अपनी शारीरिक ताकत बढ़ाने के उद्देश्य से वेट ट्रेनिंग शुरू की। शुरुआत में उन्होंने शॉटपुट और जैवलिन में भी हाथ आजमाया, लेकिन बाद में पैरा पावरलिफ्टिंग को अपना करियर बनाया।
उच्च स्तरीय प्रशिक्षण और पोषण का खर्च उठाने के लिए उन्होंने कई वर्षों तक सब्जी बेचने का काम किया। उनके पास व्हीलचेयर तक नहीं थी और वे करीब 20 किलोमीटर दूर बाजार तक जाकर सब्जियां बेचते थे। बाद में दोस्तों से उधार लेकर ई-रिक्शा खरीदा, लेकिन कोरोना महामारी के कारण उनका रोजगार भी प्रभावित हुआ।
इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।
भारत के लिए ऐतिहासिक शुरुआत
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए पहला पदक जीतकर झंडू कुमार ने न केवल देश का खाता खोला बल्कि पैरा खिलाड़ियों के मनोबल को भी नई ऊंचाई दी। उनकी उपलब्धि आने वाले दिनों में भारतीय दल के लिए प्रेरणा का स्रोत मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि झंडू कुमार का यह प्रदर्शन भारत के पैरा खेलों की बढ़ती ताकत का प्रमाण है और आगामी प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद बढ़ गई है।
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