“भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 1200 अंक तक टूट गया जबकि निफ्टी 23500 के नीचे फिसल गया। रुपये में भी रिकॉर्ड कमजोरी दर्ज हुई। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बाजार में भारी बिकवाली देखी गई।“
नई दिल्ली। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार से ही दबाव में रहे बाजार में दोपहर तक गिरावट और तेज हो गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में बड़ी कमी दर्ज की गई।
BSE Sensex करीब 1200 अंक तक टूटकर कारोबार करता दिखा, जबकि Nifty 50 भी 23,500 के स्तर से नीचे फिसल गया। बाजार में लगातार बिकवाली का दबाव बना रहा और अधिकांश सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते दिखे।
रुपये की रिकॉर्ड कमजोरी और क्रूड ऑयल ने बढ़ाया दबाव
इंट्रा-डे कारोबार में रुपये में भी बड़ी कमजोरी देखी गई और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया। कमजोर रुपये और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई बाधाओं की आशंका के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी आई है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली
बाजार आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने एक ही दिन में हजारों करोड़ रुपये की बिकवाली की है, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना।
इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी ने कुछ हद तक गिरावट को संभालने की कोशिश की, लेकिन कुल मिलाकर बाजार लाल निशान में ही रहा।
आईटी और मिडकैप शेयरों में भारी गिरावट
आज के कारोबार में आईटी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। Infosys, Tata Consultancy Services, Tech Mahindra और अन्य आईटी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला, जिससे व्यापक स्तर पर निवेशकों की संपत्ति में गिरावट आई।
निवेशकों की संपत्ति में बड़ा नुकसान
बाजार खुलने के बाद से ही लगातार गिरावट के चलते कुछ ही सत्रों में निवेशकों की संपत्ति में भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हाल के ट्रेडिंग सेशंस में लाखों करोड़ रुपये का मार्केट कैप वाष्पित हो गया है।
विशेषज्ञों की राय
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक तनाव, तेल की कीमतों में स्थिरता और रुपये की कमजोरी पर नियंत्रण नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और लंबी अवधि की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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