एमपी हाई कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर माना, मस्जिद पक्ष को अलग जमीन

इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला को मंदिर माना, वाग्देवी प्रतिमा को इंग्लैंड से वापस लाने के प्रयास का आदेश

Dhar Bhojshala Case: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने धार स्थित भोजशाला को मंदिर करार दिया है। कोर्ट ने मस्जिद पक्ष को अलग जमीन देने और इंग्लैंड से वाग्देवी प्रतिमा वापस लाने के प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।

धार। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित बहुचर्चित भोजशाला विवाद मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए भोजशाला परिसर को मंदिर करार दिया है। अदालत ने कहा कि यह स्थल मंदिर है और यहां हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार मिलेगा। वहीं मस्जिद पक्ष को अलग जमीन उपलब्ध कराने के लिए सरकार से आवेदन करने की बात कही गई है।

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद वर्षों से चले आ रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को इंग्लैंड में मौजूद मां वाग्देवी की प्रतिमा को भारत वापस लाने के प्रयास करने के निर्देश भी दिए हैं।

हिंदू पक्ष में खुशी, हाई कोर्ट परिसर के बाहर जश्न

फैसले के बाद हिंदू संगठनों और मंदिर पक्ष में खुशी का माहौल देखने को मिला। इंदौर हाई कोर्ट के बाहर समर्थकों ने मिठाइयां बांटी और जश्न मनाया।

मंदिर पक्ष के अधिवक्ता Vishnu Shankar Jain ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अदालत ने हिंदू समाज को पूजा का अधिकार दिया है और ऐतिहासिक तथ्यों को स्वीकार किया है।

मस्जिद पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाएगा

मुस्लिम पक्ष ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने का संकेत दिया है। मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Salman Khurshid समेत अन्य वकीलों ने अदालत में पक्ष रखा था।

फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष ने कहा कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।

क्या है भोजशाला विवाद?

धार स्थित भोजशाला परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और विद्या केंद्र मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता आया है। जैन समुदाय का एक वर्ग भी इसे प्राचीन जैन मंदिर और गुरुकुल मानता है।

करीब चार वर्षों से हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। हिंदू पक्ष ने अदालत से भोजशाला को मंदिर घोषित करने और वर्षभर पूजा-अर्चना की अनुमति देने की मांग की थी।

वाग्देवी प्रतिमा भी विवाद का केंद्र

मामले में मां वाग्देवी की प्रतिमा भी प्रमुख मुद्दा रही। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 1875 में खुदाई के दौरान प्रतिमा मिलने का उल्लेख है। बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान यह प्रतिमा इंग्लैंड ले जाई गई थी।

अब हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह प्रतिमा को वापस भारत लाने के लिए गंभीर प्रयास करे।

फैसले के बाद हाई अलर्ट पर प्रशासन

फैसले को देखते हुए धार जिले में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया है।

भोजशाला परिसर, प्रमुख बाजारों और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार पुलिस गश्त की जा रही है। एहतियातन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 भी लागू कर दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या तनाव की स्थिति को रोका जा सके।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जिले में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

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