भीषण गर्मी में यूपी पर बिजली संकट की मार, एक दर्जन पावर प्लांट रहे ठप

रिकॉर्ड मांग के बीच एक दर्जन बिजली संयंत्रों से सप्लाई प्रभावित, उपभोक्ताओं को झेलनी पड़ रही अघोषित कटौती

उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती की बड़ी वजह सामने आई है। कई पावर प्लांट बंद होने से यूपी पावर कॉरपोरेशन को पर्याप्त बिजली नहीं मिल सकी। रिकॉर्ड 669 मिलियन यूनिट मांग के बीच बिजली संकट और अघोषित कटौती की खबर पढ़ें।

भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती बिजली मांग के बीच उत्तर प्रदेश में बिजली संकट गहराता जा रहा है। प्रदेश में हो रही अघोषित बिजली कटौती के पीछे बड़ी वजह कई पावर प्लांटों का बंद होना भी माना जा रहा है। पावर कॉरपोरेशन को बिजली सप्लाई करने वाले यूपी समेत अन्य राज्यों के करीब एक दर्जन पावर प्लांट मई महीने में अलग-अलग अवधि तक बंद रहे, जिससे विद्युत उत्पादन और आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा।

ऊर्जा विभाग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पावर कॉरपोरेशन ने इन बिजली संयंत्रों से विद्युत खरीद के लिए पहले से करार कर रखा है, लेकिन तकनीकी खामियों, मरम्मत और मेंटेनेंस के कारण कई प्लांटों ने उत्पादन रोक दिया। इसका असर प्रदेशभर में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।

15 दिन तक बंद रहा 660 मेगावाट का प्लांट

जानकारों के अनुसार, एक 660 मेगावाट क्षमता वाला पावर प्लांट करीब 15 दिनों तक बंद रहा। वहीं दूसरा बड़ा संयंत्र लगभग 11 दिनों तक उत्पादन से बाहर रहा। इसके अलावा अन्य कई यूनिट भी समय-समय पर शटडाउन पर चली गईं। ऐसे समय में जब प्रदेश में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है, उत्पादन इकाइयों का बंद होना चिंता का विषय बन गया है।

रिकॉर्ड मांग के बीच बढ़ा दबाव

प्रदेश में गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की खपत भी तेजी से बढ़ी है। 22 मई को उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में अब तक की सबसे अधिक 669 मिलियन यूनिट बिजली आपूर्ति दर्ज की गई। एयर कंडीशनर, कूलर, पंप और घरेलू उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण मांग लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है।

ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ने से कई क्षेत्रों में लोड प्रबंधन करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरों में भी लोकल फॉल्ट और ओवरलोडिंग की समस्याएं बढ़ी हैं।

उत्पादन प्रभावित होने से बढ़ी अघोषित कटौती

बिजली विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पावर प्लांट समय पर चालू रहते तो कटौती की स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। उत्पादन में कमी के कारण पावर कॉरपोरेशन को खुले बाजार से महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है। इसके बावजूद मांग पूरी नहीं हो पा रही है।

प्रदेश के कई जिलों में उपभोक्ता लगातार बिजली कटौती की शिकायत कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में निर्धारित रोस्टर से कम आपूर्ति मिलने और शहरी क्षेत्रों में बार-बार ट्रिपिंग की समस्या सामने आ रही है।

सरकार और विभाग पर उठ रहे सवाल

रिकॉर्ड मांग के बीच बिजली संयंत्रों का लंबे समय तक बंद रहना अब सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम से पहले उत्पादन इकाइयों की तैयारियों और मेंटेनेंस प्लानिंग को बेहतर बनाने की जरूरत है, ताकि पीक डिमांड के दौरान संकट की स्थिति न बने।

उधर, ऊर्जा विभाग का दावा है कि उपलब्ध संसाधनों के अनुसार अधिकतम बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है और बंद पड़ी इकाइयों को जल्द चालू कराने की प्रक्रिया जारी है।

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