पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन बचाने की मुहिम, CM योगी से मिला उत्तराखंड का प्रतिनिधिमंडल

उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की मांग, बाहरी संस्था को संचालन सौंपने का किया विरोध

लखनऊ में पर्वतीय महापरिषद के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन को संरक्षित रखने की मांग उठाई। प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को लेकर ज्ञापन सौंपा।

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक अस्मिता को संरक्षित रखने की मांग को लेकर शुक्रवार को पर्वतीय महापरिषद का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने बीरबल साहनी मार्ग स्थित भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन को संरक्षित रखने और उसके संचालन को बाहरी संस्था को न सौंपे जाने की मांग उठाई।

पर्वतीय महापरिषद के अध्यक्ष गणेश चंद्र जोशी और उत्तराखंड महापरिषद के अध्यक्ष हरीश चंद्र पंत ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यह उपवन केवल एक आयोजन स्थल नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता का प्रमुख केंद्र है।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि नगर निगम द्वारा पर्वतीय समाज के सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए आवंटित इस उपवन के संचालन हेतु लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने बाहरी संस्था को जिम्मेदारी देने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। इस प्रस्ताव को लेकर पर्वतीय समाज में गहरी नाराजगी और विरोध है।

महापरिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि इस स्थल का संचालन किसी बाहरी संस्था को सौंपा गया तो वर्षों से आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि यहां प्रतिवर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर 15 दिवसीय ‘उत्तरायणी कौथिग’ का आयोजन होता है, जिसमें उत्तराखंड की लोक संस्कृति, खानपान, लोकगीत और परंपराओं की झलक देखने को मिलती है।

इसके अलावा नवंबर माह में आयोजित होने वाला 10 दिवसीय ‘उत्तराखंड महोत्सव’ भी प्रदेशभर के पर्वतीय समाज को एक मंच पर जोड़ता है। हरेला, फूलदेई और उत्तराखंड की महान विभूतियों की जयंती एवं पुण्यतिथि जैसे अनेक सांस्कृतिक आयोजन भी इसी परिसर में आयोजित किए जाते हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मांग की कि इस उपवन की मूल सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखा जाए और पर्वतीय समाज की भागीदारी के साथ ही इसका संचालन सुनिश्चित किया जाए। प्रतिनिधिमंडल में केएन चंदोला, महासचिव हरीश कुमार बिष्ट समेत कई पदाधिकारी और समाज के लोग मौजूद रहे।

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