“अलीगढ़ डीएम अविनाश कुमार ने IGRS शिकायतों के खराब निस्तारण पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 33 अधिकारियों का मई माह का वेतन रोक दिया। बिजली विभाग, लोक निर्माण विभाग समेत कई विभागों के अधिकारी कार्रवाई की जद में आए। पढ़ें पूरी खबर।“
अलीगढ़। मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण में लगातार लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ अलीगढ़ जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी Avinash Kumar ने शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण में खराब प्रदर्शन करने वाले 33 अधिकारियों का मई माह का वेतन रोकने के आदेश जारी किए हैं।
डीएम की इस कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जब तक शिकायतों के निस्तारण की गुणवत्ता में सुधार नहीं होगा, तब तक संबंधित अधिकारियों का वेतन जारी नहीं किया जाएगा।
आईजीआरएस समीक्षा में सामने आई गंभीर खामियां
जिलाधिकारी द्वारा की गई समीक्षा में कई विभागों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक पाया गया। सबसे खराब स्थिति बिजली विभाग की सामने आई। समीक्षा के दौरान पाया गया कि बिजली वितरण खंड के अधिशासी अभियंता के यहां कुल 464 शिकायतें लंबित थीं, जिनमें से 260 शिकायतों का निस्तारण असंतोषजनक पाया गया।
विभाग का संतोषजनक निस्तारण प्रतिशत मात्र 44 प्रतिशत रहा। वहीं बिजली वितरण खंड-5 की स्थिति और भी चिंताजनक मिली, जहां प्राप्त शिकायतों में एक भी शिकायत का संतोषजनक निस्तारण नहीं पाया गया।
लोक निर्माण विभाग भी फिसड्डी साबित हुआ
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कार्यप्रणाली भी प्रशासनिक समीक्षा में सवालों के घेरे में रही। प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता के यहां कुल 397 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 262 शिकायतों का निस्तारण असंतोषजनक पाया गया।
विभाग का संतोषजनक निस्तारण प्रतिशत मात्र 34 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसे प्रशासन ने बेहद खराब प्रदर्शन माना है।
कई विभागों में एक भी शिकायत का संतोषजनक निस्तारण नहीं
समीक्षा के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कुछ विभागों में प्राप्त शिकायतों में से एक भी शिकायत का गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक निस्तारण नहीं किया गया। इसे प्रशासनिक उदासीनता और जवाबदेही की कमी का गंभीर उदाहरण माना गया।
डीएम ने कहा कि आईजीआरएस शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और जनता की शिकायतों के समाधान में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
इन अधिकारियों पर गिरी गाज
कार्रवाई की जद में बिजली विभाग, लोक निर्माण विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, पंचायत विभाग, समाज कल्याण विभाग और अन्य कई विभागों के अधिकारी आए हैं।
वेतन रोके गए अधिकारियों में वरिष्ठ कोषाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी, जिला क्रीड़ा अधिकारी, कृषि विभाग के उप निदेशक, विभिन्न विकास खंडों के बीडीओ, चिकित्सा अधीक्षक, विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।
पहले भी दिए गए थे निर्देश
जिलाधिकारी ने अपने आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया है कि 30 अप्रैल को भी शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इसके बावजूद कई विभागों की कार्यप्रणाली में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति प्रशासनिक जवाबदेही की कमी और कार्यों के प्रति उदासीन रवैये को दर्शाती है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सुधार नहीं हुआ तो होगी और कड़ी कार्रवाई
डीएम ने सभी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आगामी समीक्षा में भी शिकायतों के निस्तारण की स्थिति में सुधार नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ और अधिक कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण शासन की प्राथमिकता है और जनता की समस्याओं के समाधान में किसी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
एक साथ 33 अधिकारियों का वेतन रोके जाने की कार्रवाई प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसे आईजीआरएस व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की दिशा में अलीगढ़ प्रशासन की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है।
जिलाधिकारी का स्पष्ट संदेश है कि जनता की शिकायतों का समाधान केवल कागजों में नहीं, बल्कि गुणवत्ता और संतुष्टि के आधार पर होना चाहिए। प्रशासन अब इसी मानक पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगा।
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