रेलवे टेंडरों में AI की एंट्री: फर्जी सर्टिफिकेट पकड़ते ही हाथरस की फर्म पर दो साल का बैन

टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने को रेलवे ने अपनाई नई तकनीक; फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र अपलोड करने पर ईएमडी जब्त, आईआरईपीएस लॉग-इन भी निष्क्रिय

रेलवे ने टेंडर प्रक्रिया में AI और ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया। हाथरस की एक फर्म फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र अपलोड करते पकड़ी गई। रेलवे ने फर्म को दो साल के लिए बैन कर EMD जब्त कर ली।

प्रयागराज। रेलवे ने टेंडर प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्वचालित सत्यापन तंत्र (ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन टूल्स) का उपयोग शुरू कर दिया है। नई तकनीक के जरिए पहली बड़ी कार्रवाई में उत्तर प्रदेश के हाथरस की एक फर्म को फर्जी दस्तावेज लगाने के मामले में दोषी पाए जाने पर दो वर्षों के लिए रेलवे के सभी टेंडरों से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार, हाथरस जिले के दयानतपुर (रुहेरी) स्थित फर्म ‘मेसर्स मधु रावत’ ने उत्तर मध्य रेलवे के अंतर्गत सड़क मरम्मत कार्य से जुड़े एक ई-टेंडर में पात्रता साबित करने के लिए अलीगढ़ की अतरौली नगर पालिका परिषद के नाम से कथित अनुभव प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेज अपलोड किए थे। फर्म को उम्मीद थी कि दस्तावेजों की सत्यता की जांच नहीं हो पाएगी, लेकिन रेलवे के नए एआई आधारित सत्यापन सिस्टम ने प्रारंभिक जांच में ही इन दस्तावेजों को संदिग्ध चिह्नित कर दिया।

इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराया। अतरौली प्रशासन ने लिखित रूप से स्पष्ट किया कि उनकी ओर से ऐसा कोई प्रमाण-पत्र कभी जारी नहीं किया गया था और प्रस्तुत दस्तावेज पूरी तरह फर्जी हैं। सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद रेलवे प्रशासन ने मामले को गंभीर अनियमितता मानते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।

रेलवे बोर्ड के कार्यपालक निदेशक अजीत कुमार झा ने उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेशपाल सिंह को पत्र जारी कर संबंधित फर्म और उसके साझेदारों की इंडियन रेलवे ई-प्रोक्योरमेंट सिस्टम (IREPS) पर मौजूद लॉग-इन आईडी को तत्काल प्रभाव से निष्क्रिय करने के निर्देश दिए। साथ ही टेंडर समिति की संस्तुति पर फर्म द्वारा जमा की गई अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट (EMD) भी जब्त कर ली गई।

रेलवे के आदेश के अनुसार अब यह फर्म अगले दो वर्षों तक भारतीय रेलवे के किसी भी जोन, मंडल या इकाई में किसी प्रकार के टेंडर में भाग नहीं ले सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि यह कार्रवाई अन्य ठेकेदारों के लिए भी कड़ा संदेश साबित होगी।

उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) शशिकांत त्रिपाठी ने बताया कि रेलवे टेंडर प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एआई तथा ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन टूल्स का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नई तकनीक के उपयोग से फर्जी दस्तावेज, गलत अनुभव प्रमाण-पत्र और अन्य प्रकार की अनियमितताओं की पहचान पहले से अधिक तेजी और सटीकता से की जा सकेगी।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल निगरानी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जांच व्यवस्था भविष्य में टेंडर प्रक्रिया को और अधिक विश्वसनीय बनाएगी तथा सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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