“Ram Mandir Donation Theft Case: इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने भ्रष्टाचार पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राम मंदिर दान चोरी से भी लोग शर्मिंदा नहीं हुए। कोर्ट ने भ्रष्टाचारियों के लिए सख्त सजा की बात कही।“
प्रयागराज। देश में बढ़ते भ्रष्टाचार को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने भ्रष्टाचार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राम मंदिर में आए दान की चोरी जैसी घटना से भी लोग शर्मिंदा नहीं हुए, यह ईमानदारी के गिरते स्तर को दिखाता है।
हाई कोर्ट ने कहा कि समाज में भ्रष्टाचार को धीरे-धीरे सामान्य मान लिया गया है और अब कई मामलों में लोगों को गलत काम करने से ज्यादा डर पकड़े जाने का रहता है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का किया जिक्र
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने अपने 51 पेज के फैसले में भ्रष्टाचार पर विस्तार से टिप्पणी की।
उन्होंने कहा कि दशकों से औसत भारतीय समाज ने भ्रष्टाचार को एक सामान्य बात की तरह स्वीकार कर लिया है।
कोर्ट ने ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार की स्थिति चिंताजनक है। राम मंदिर में दान राशि से जुड़ा विवाद समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।
भ्रष्टाचारियों के लिए सख्त सजा की बात
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने कहा कि भ्रष्टाचार के दोषियों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान होना चाहिए।
उन्होंने टिप्पणी की कि भ्रष्टाचार देश की व्यवस्था को कमजोर करता है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई जरूरी है।
अवैध निर्माण में अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
हाई कोर्ट ने अवैध निर्माण और बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े मामलों में अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
कोर्ट ने कहा कि कई बार नगर निगम और अन्य विभागों के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण खड़े हो जाते हैं।
बाद में कार्रवाई होने पर आम खरीदारों को नुकसान उठाना पड़ता है।
रिश्वत लेने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो
अदालत ने कहा कि यदि अवैध निर्माण के लिए अधिकारी जिम्मेदार हैं तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि अवैध कब्जे को संरक्षण नहीं दिया जा सकता, लेकिन सरकारी अधिकारियों की लापरवाही और भ्रष्टाचार को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बुलडोजर कार्रवाई पर हाई कोर्ट के निर्देश
मामला हमीरपुर निवासी फैमुद्दीन और दो अन्य की याचिका से जुड़ा है।
याचिकाकर्ताओं ने बुलडोजर कार्रवाई की आशंका जताते हुए हाई कोर्ट से सुरक्षा मांगी थी।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने निर्देश दिया कि:
- एफआईआर दर्ज होने के दो साल तक किसी आरोपी का घर न गिराया जाए।
- लंबे समय से रह रहे लोगों को कार्रवाई से पहले पर्याप्त सूचना दी जाए।
- प्रभावित लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था का मौका मिले।
पीठ में मतभेद, मामला तीसरे न्यायमूर्ति को भेजा जाएगा
इस मामले में खंडपीठ के दूसरे न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंदन ने कुछ बिंदुओं पर असहमति जताई है।
उनका कहना है कि हाई कोर्ट अनुच्छेद 226 के तहत ऐसी निश्चित समय सीमा तय नहीं कर सकता।
अब मामले को तीसरे न्यायमूर्ति के पास भेजा जाएगा।
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