प्रयागराज हत्याकांड: IPL सट्टे में 42 लाख हारने के बाद रची गई खूनी साजिश, बेटे ने दोस्त संग परिवार को मौत के घाट उतारा

डेढ़ करोड़ के जेवर हथियाने के लिए मां-बाप और बहन की हत्या, बाद में हिस्सेदारी विवाद में दोस्त ने आरोपी बेटे को भी मार डाला; जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासे

Prayagraj Murder Case : प्रयागराज में कारोबारी वीरेंद्र वैश्य, उनकी पत्नी और बेटी की हत्या के पीछे IPL सट्टेबाजी, कर्ज और डेढ़ करोड़ रुपये के गहनों की लालच का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया कि बेटे अभिषेक और उसके दोस्त सनी गुप्ता ने मिलकर वारदात को अंजाम दिया था।

प्रयागराज। प्रयागराज के चर्चित वैश्य परिवार हत्याकांड में पुलिस जांच के दौरान ऐसे खुलासे हुए हैं, जिन्होंने पूरे मामले को और भी सनसनीखेज बना दिया है। कारोबारी वीरेंद्र वैश्य, उनकी पत्नी अनीता वैश्य और बेटी मीनाक्षी की हत्या के पीछे IPL सट्टेबाजी में हुए भारी नुकसान और करोड़ों रुपये के गहनों की लालच मुख्य वजह बताई जा रही है।

पुलिस के अनुसार व्यापारी के बेटे अभिषेक वैश्य और उसके दोस्त सनी गुप्ता ने मिलकर इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया था। बाद में दोनों के बीच हिस्सेदारी को लेकर विवाद हुआ और सनी ने अभिषेक की भी हत्या कर दी।

IPL सट्टे में हार गए थे 42 लाख रुपये

जांच में सामने आया कि अभिषेक और सनी IPL मैचों पर लगातार सट्टा लगा रहे थे। दोनों को बड़ी रकम जीतने की उम्मीद थी, लेकिन वे लगातार नुकसान उठाते रहे। पुलिस के मुताबिक सनी वर्ष 2025 के IPL सीजन में लगभग 25 लाख रुपये हार चुका था, जबकि अभिषेक के साथ मिलकर कुल नुकसान करीब 42 लाख रुपये तक पहुंच गया था।

दोनों पर कर्ज का दबाव बढ़ता जा रहा था। उधार देने वाले लोग लगातार पैसे वापस मांग रहे थे और नए दांव लगाने के लिए भी रकम की जरूरत थी।

डेढ़ करोड़ के गहनों के लिए बनाई हत्या की योजना

पुलिस के अनुसार अभिषेक और सनी की नजर घर में रखे करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य के स्वर्णाभूषणों पर थी। उन्हें लगा कि परिवार के सदस्यों को रास्ते से हटाकर वे गहनों पर कब्जा कर सकते हैं और कर्ज चुकाने के साथ-साथ आगे सट्टेबाजी में भी पैसा लगा सकेंगे।

इसी लालच में दोनों ने कथित तौर पर अभिषेक के माता-पिता और बहन की हत्या की साजिश बनाई और वारदात को अंजाम दिया।

पिता से पैसों को लेकर होता था विवाद

जांच में यह भी सामने आया कि अभिषेक अक्सर अपने पिता से पैसे मांगता था। कारोबारी वीरेंद्र वैश्य उसे बड़ी रकम देने से इनकार कर देते थे, जिसके कारण दोनों के बीच विवाद होता रहता था।

सट्टेबाजी में बढ़ते नुकसान और कर्ज के दबाव ने अभिषेक को अपराध की राह पर धकेल दिया। पुलिस का मानना है कि आर्थिक संकट और जल्द पैसा पाने की लालसा ने इस जघन्य अपराध की पृष्ठभूमि तैयार की।

बड़े भाई को फंसाने की कोशिश

हत्या के बाद अभिषेक ने जांच को गुमराह करने की भी कोशिश की। पुलिस के मुताबिक उसने घर में पड़े एक गत्ते पर “बंटी-बबली ने मारा है” लिखकर बड़े भाई अश्वनी को संदेह के घेरे में लाने का प्रयास किया।

अश्वनी पहले से धोखाधड़ी के मामले में जेल में बंद है। पुलिस जांच में पता चला कि उसे कई वर्ष पहले ही परिवार की संपत्ति से बेदखल किया जा चुका था।

जेल में बंद बड़े भाई से भी हुई पूछताछ

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने जेल पहुंचकर बड़े भाई अश्वनी वैश्य से भी पूछताछ की। उसने बताया कि उसे जमानत तो मिल चुकी है, लेकिन जमानतदार नहीं मिलने के कारण वह अब भी जेल में है।

पुलिस को जांच में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला जिससे इस हत्याकांड में उसकी प्रत्यक्ष भूमिका साबित हो सके।

पुलिस के सामने खुली साजिश की परतें

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल पारिवारिक विवाद का नहीं बल्कि सट्टेबाजी, कर्ज, लालच और आर्थिक दबाव से जुड़ा संगठित अपराध है। पुलिस अब वारदात से जुड़े आर्थिक लेन-देन, सट्टेबाजी नेटवर्क और अन्य संभावित कड़ियों की भी जांच कर रही है।

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