RMLIMS Convocation 2026: डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ के तृतीय दीक्षांत समारोह में 340 छात्रों को डिग्री और 26 मेधावियों को पदक प्रदान किए गए। संस्थान ने शोध, रोबोटिक सर्जरी, ट्रांसप्लांट, रोगी सेवाओं और मेडिकल शिक्षा में बड़ी उपलब्धियां दर्ज की हैं।
लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के तृतीय दीक्षांत समारोह का शुभारंभ मंगलवार को भव्य शैक्षणिक शोभायात्रा के साथ हुआ। समारोह में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, रोगी सेवाओं और संस्थान की भावी विकास योजनाओं की उपलब्धियों को प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए, जबकि संस्थान के भविष्य के विस्तार से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की जानकारी भी साझा की गई।

समारोह में मंचासीन अतिथियों का स्वागत चंदन के पौधे भेंट कर किया गया। संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह के अनुरोध पर दीक्षांत समारोह की औपचारिक शुरुआत की गई। संस्थान के उपाध्यक्ष अमित कुमार घोष तथा अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा समाज निर्माण और मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम है।
‘ज्ञान से अधिक व्यवहार याद रखा जाता है’
संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि अब उनके सामने किताबों से आगे वास्तविक जीवन की चुनौतियां होंगी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा का केंद्र मरीज की संवेदनाएं और विश्वास होना चाहिए।

उन्होंने कहा, “चिकित्सा की सबसे बड़ी सफलता किसी रिपोर्ट में नहीं बल्कि मरीज की राहत और संतुष्टि में दिखाई देती है। लोग आपको आपके ज्ञान से कम और आपके व्यवहार से अधिक याद रखेंगे।”
200 एमबीबीएस समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में हर वर्ष प्रवेश
निदेशक ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि वर्ष 2006 में स्थापित संस्थान ने 2009 में ओपीडी सेवाएं शुरू की थीं तथा 2018 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ।
वर्तमान में संस्थान में प्रतिवर्ष—
- 200 एमबीबीएस
- 40 बीएससी नर्सिंग
- 107 एमडी/एमएस
- 36 डीएम/एमसीएच
- 6 एमएससी (न्यूक्लियर मेडिसिन)
- 4 डीएनबी
- 2 एफएनबी
- 76 पैरामेडिकल डिप्लोमा
तथा 35 पीएचडी शोधार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है।
संस्थान के 34 विभागों में शिक्षण कार्य संचालित है। वर्ष 2026-27 में एफएनबी और डीएनबी की सात अतिरिक्त सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है।

148 अनुसंधान परियोजनाएं और तीन पेटेंट
वर्ष 2025-26 के दौरान संस्थान में शोध गतिविधियों ने नई ऊंचाइयां हासिल कीं।
- 148 नई अनुसंधान परियोजनाएं शुरू हुईं।
- 20 क्लीनिकल ट्रायल आरंभ किए गए।
- एमबीबीएस विद्यार्थियों द्वारा 8 शोध परियोजनाएं संचालित की गईं।
- 90 थीसिस कार्य पूरे किए गए।
- संस्थान के नाम तीन पेटेंट दर्ज हुए।
यूनिसेफ के सहयोग से उत्तर प्रदेश में लेड पॉइजनिंग के आकलन की परियोजना संचालित की जा रही है, जिसे जल्द पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा।
एक दिन में जांच, बिना प्रतीक्षा इलाज की सुविधा
संस्थान ने रोगी सेवाओं में कई अभिनव पहलें शुरू की हैं।
प्रमुख सुविधाएं
- ईको, सीटी स्कैन, एमआरआई और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचें उसी दिन उपलब्ध।
- भर्ती मरीजों तक सीधे बेड पर दवाओं की आपूर्ति।
- इमरजेंसी मरीजों के लिए पोर्टर सिस्टम।
- 24×7 ग्रीन ओपीडी सुविधा।
- टेली-फॉलो-अप सेवा के माध्यम से घर बैठे विशेषज्ञ परामर्श।
- क्यूआर कोड आधारित शिकायत निवारण व्यवस्था।
क्यूआर आधारित प्रणाली के माध्यम से अब तक 2,266 से अधिक शिकायतों का समाधान किया जा चुका है।

‘हृदय सेतु’ कार्यक्रम से 744 गंभीर हृदय रोगियों की पहचान
संस्थान द्वारा संचालित “हृदय सेतु” कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 10 जिलों को जोड़ा गया है।
- 24 हजार से अधिक ईसीजी परीक्षण।
- 744 गंभीर स्टेमी रोगियों की पहचान।
- 483 मरीजों का समयबद्ध थ्रोम्बोलाइसिस।
- 240 गंभीर मरीजों को संस्थान में भर्ती कर उपचार।
200 किडनी प्रत्यारोपण, जल्द शुरू होंगे बोन मैरो और लिवर ट्रांसप्लांट
अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में भी संस्थान ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
- ट्रांसप्लांट सेंटर का निर्माण पूर्ण।
- अब तक 200 रीनल (किडनी) ट्रांसप्लांट।
- थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तैयारी।
- लिवर ट्रांसप्लांट सेवा शीघ्र शुरू होगी।
- अगस्त 2026 से कॉर्निया प्रत्यारोपण शुरू करने की योजना।
350 से अधिक रोबोटिक सर्जरियां सफल
विश्वस्तरीय रोबोटिक सर्जरी प्रणाली के माध्यम से संस्थान में 350 से अधिक रोबोटिक ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।
न्यूरो साइंस सेंटर में—
- लगभग 150 बेड उपलब्ध हैं।
- 8,700 से अधिक मरीज भर्ती होकर उपचार पा चुके हैं।
- पहली बार पार्किंसन रोग के लिए डीप ब्रेन स्टिमुलेशन सर्जरी सफल रही।
- उत्तर प्रदेश का पहला गामा नाइफ सिस्टम शीघ्र शुरू होगा।
1010 बेड का नया अस्पताल बनेगा
संस्थान के विस्तार की दिशा में कई बड़े निर्माण कार्य जारी हैं।
प्रमुख परियोजनाएं
- शहीद पथ परिसर में 1010 बेड का अत्याधुनिक अस्पताल।
- 100 बेड का क्रिटिकल केयर सेंटर।
- 888 बेड के छात्रावास।
- पांच मंजिला आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स।
- नर्सिंग एवं पैरामेडिकल अकादमिक भवन।
- 500 बेड क्षमता वाले पीआरए भवन का निर्माण।
- 350 बेड का लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर प्रस्तावित।
राज्यपाल ने दिया समाज सेवा का संदेश
समारोह को ऑनलाइन संबोधित करते हुए आनंदीबेन पटेल ने कहा कि करोड़ों लोगों की स्वास्थ्य संबंधी आशाएं अब इन विद्यार्थियों से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज के कल्याण के लिए समर्पित हो।
उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने दी बधाई
बृजेश पाठक ने सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है तथा भविष्य में भी विद्यार्थियों और संस्थानों को हर संभव सहयोग दिया जाएगा।

राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने विद्यार्थियों को स्वस्थ रहने और समाज को वापस कुछ देने की प्रेरणा दी।
26 पदक वितरित, प्रो. राजन भटनागर बने उत्कृष्ट शिक्षक
दीक्षांत समारोह में डीएम, एमसीएच, एमडी, एमएस, एमबीबीएस, बीएससी नर्सिंग और एमएससी न्यूक्लियर मेडिसिन के विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं।
- चांसलर्स मेडल
- डायरेक्टर्स मेडल
- अन्य 24 शैक्षणिक पदक
सहित कुल 26 पदक एवं प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए।
साथ ही प्रो. राजन भटनागर, विभागाध्यक्ष एनाटॉमी विभाग, को “उत्कृष्ट अध्यापक सम्मान” से सम्मानित किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामाजिक सरोकारों का भी संगम
समारोह में एमबीबीएस विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। गोद लिए गए गांवों के स्कूली बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण पर नाट्य मंचन किया। विभिन्न प्रतियोगिताओं के नौ विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को किट वितरित की गईं। सामाजिक संस्था “जनमंच” द्वारा पुस्तक वितरण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसके तहत कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों को 100 पुस्तकें भेंट की गईं।
तृतीय दीक्षांत समारोह चिकित्सा शिक्षा, शोध, सामाजिक दायित्व और स्वास्थ्य सेवाओं में आरएमएलआईएमएस की बढ़ती भूमिका का प्रभावशाली प्रदर्शन बनकर उभरा।
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