पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत भारत-जापान की बड़ी पहल, JCM नियमों को मिली मंजूरी

भारत और जापान ने पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत Joint Crediting Mechanism (JCM) के कार्यान्वयन नियम अपनाए हैं। इससे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, हरित निवेश, तकनीक हस्तांतरण और सतत विकास परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।

नई दिल्ली। भारत और जापान ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Joint Crediting Mechanism (JCM) के लिए Rule of Implementation को औपचारिक रूप से अपनाया है। यह व्यवस्था संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (UNFCCC) के पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत लागू की जाएगी।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह निर्णय 8 जून 2026 को लिया गया। इससे भारत और जापान के बीच जलवायु सहयोग को नई मजबूती मिलेगी।

क्या है Joint Crediting Mechanism (JCM)?

Joint Crediting Mechanism एक ऐसा सहयोगी ढांचा है जिसके माध्यम से दोनों देश मिलकर ऐसी परियोजनाएं विकसित करेंगे जो ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाने या कार्बन हटाने में मदद करें।

इसके साथ ही यह तंत्र दोनों देशों के Nationally Determined Contributions (NDCs) यानी राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी योगदान देगा।

2025 में हुआ था समझौता

भारत और जापान ने वर्ष 2025 में इस संबंध में Memorandum of Cooperation (MoC) पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते का उद्देश्य जलवायु अनुकूल तकनीकों, हरित ऊर्जा परियोजनाओं और सतत विकास कार्यक्रमों को बढ़ावा देना था।

अब कार्यान्वयन नियम लागू होने के बाद परियोजनाओं को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी।

कैसे काम करेगा नया तंत्र?

नई व्यवस्था के तहत:

संयुक्त समिति (Joint Committee)

भारत और जापान के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति बनाई जाएगी जो परियोजनाओं की निगरानी करेगी।

पारदर्शी अनुमोदन प्रक्रिया

हर परियोजना को तय मानकों के आधार पर मंजूरी दी जाएगी।

थर्ड पार्टी वैलिडेशन

स्वतंत्र एजेंसियां परियोजनाओं की जांच और सत्यापन करेंगी।

सतत विकास सुरक्षा मानक

पर्यावरण और सामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे।

राष्ट्रीय रजिस्ट्री सिस्टम

क्रेडिट जारी करने और उनके हस्तांतरण की निगरानी के लिए विशेष रजिस्ट्रियों का उपयोग किया जाएगा।

भारत को क्या होगा लाभ?

विशेषज्ञों के अनुसार इस तंत्र से भारत को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा:

  • हरित तकनीकों का तेज़ी से विस्तार
  • विदेशी निवेश में वृद्धि
  • स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं को प्रोत्साहन
  • कार्बन उत्सर्जन में कमी
  • कौशल विकास और क्षमता निर्माण
  • जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में सहायता

MoEFCC ने क्या कहा?

पर्यावरण मंत्रालय ने कहा कि Joint Crediting Mechanism भारत की जलवायु कार्रवाई के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मंत्रालय के अनुसार यह व्यवस्था भारत में कम-कार्बन तकनीकों वाली परियोजनाओं के लिए निवेश आकर्षित करेगी तथा जलवायु परिवर्तन शमन और सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद करेगी।

वैश्विक जलवायु सहयोग में नया अध्याय

भारत और जापान की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और कार्बन उत्सर्जन की चुनौतियों का सामना कर रही है। JCM के माध्यम से दोनों देश न केवल अपने जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने का प्रयास करेंगे बल्कि विकासशील देशों के लिए भी एक प्रभावी सहयोग मॉडल प्रस्तुत करेंगे।

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