रजिस्ट्री के निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं का उग्र प्रदर्शन, सरकार की निकाली शव यात्रा

शाहाबाद में हड़ताल दूसरे दिन भी जारी, अधिवक्ताओं, स्टाम्प वेंडरों और दस्तावेज लेखकों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

हरदोई के शाहाबाद में निबंधन विभाग के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, स्टाम्प वेंडरों और दस्तावेज लेखकों का आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। अधिवक्ता संघ के नेतृत्व में सरकार की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली गई और निजीकरण का प्रस्ताव वापस लेने की मांग की गई।

शाहाबाद (हरदोई)। निबंधन विभाग के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अधिवक्ताओं, स्टांप विक्रेताओं और दस्तावेज लेखकों का आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। संयुक्त मोर्चा के बैनर तले अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और प्रतीकात्मक रूप से सरकार की शव यात्रा निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।

अधिवक्ता संघ अध्यक्ष विमलेश लोधी के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, स्टांप वेंडर और दस्तावेज लेखक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि निबंधन विभाग के निजीकरण का प्रस्ताव उनके रोजगार और हितों पर सीधा प्रहार है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

निजीकरण प्रस्ताव वापस लेने की मांग

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने सरकार से निबंधन विभाग के निजीकरण संबंधी प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की। उनका कहना था कि इस कदम से अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं की आजीविका प्रभावित होगी, जिससे हजारों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

अधिवक्ता संघ अध्यक्ष विमलेश लोधी ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही अधिवक्ताओं की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया और प्रस्तावित व्यवस्था को वापस नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के अधिवक्ता इस मुद्दे पर एकजुट हैं और आवश्यकता पड़ने पर बड़े स्तर पर प्रदर्शन तथा कार्य बहिष्कार किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अधिवक्ता समाज अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार है।

कलमबंद हड़ताल जारी

आंदोलन के तहत अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्यों से दूरी बनाते हुए कलमबंद हड़ताल जारी रखी। इसके चलते तहसील और रजिस्ट्री कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहा तथा रजिस्ट्री कराने आए लोगों को भी असुविधा का सामना करना पड़ा।

संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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