होर्मुज से गुजरने के लिए अब ईरान की मंजूरी जरूरी, आवेदन के बिना नहीं मिलेगी एंट्री

नई परमिट व्यवस्था लागू; 48 घंटे पहले आवेदन, विस्तृत जानकारी और निर्धारित मार्ग का पालन अनिवार्य

तेहरान। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शामिल Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों के लिए ईरान ने नई अनुमति व्यवस्था लागू कर दी है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद अब कोई भी जहाज बिना पूर्व अनुमति के इस जलडमरूमध्य से नहीं गुजर सकेगा। ईरान ने इसके लिए एक नई संस्था का गठन किया है, जो सभी जहाजों के आवेदन की जांच कर उन्हें अनुमति प्रदान करेगी।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी हैं। चूंकि वैश्विक तेल और एलएनजी व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है, इसलिए इस फैसले के दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।

नई एजेंसी करेगी निगरानी

ईरान ने इस व्यवस्था के संचालन के लिए Persian Gulf Strait Authority नामक नई एजेंसी बनाई है। पहले अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत जहाज बिना किसी विशेष अनुमति के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकते थे, लेकिन अब हर जहाज को ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा।

पीजीएसए आवेदन की समीक्षा कर अनुमति जारी करेगी। अनुमति मिलने के बाद ही जहाज निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ सकेंगे।

48 घंटे पहले करना होगा आवेदन

नई व्यवस्था के तहत जहाज संचालकों को होर्मुज क्षेत्र में प्रवेश से कम से कम 48 घंटे पहले आवेदन जमा करना होगा। ईरान का कहना है कि इससे समुद्री यातायात का बेहतर प्रबंधन, सुरक्षा जोखिमों में कमी और संभावित दुर्घटनाओं की रोकथाम संभव होगी।

एजेंसी को आवेदन की समीक्षा के लिए 48 घंटे तक का समय मिलेगा। अधूरी या गलत जानकारी मिलने पर आवेदन को लंबित रखा जा सकता है या अस्वीकार भी किया जा सकता है।

केवल नियमों का पालन करने वाले जहाजों को मिलेगी अनुमति

पीजीएसए के नियमों के अनुसार जहाजों को अपने बारे में विस्तृत जानकारी देनी होगी। इसमें जहाज का नाम, झंडा, आईएमओ नंबर, कार्गो का प्रकार, चालक दल की संख्या, राष्ट्रीयता, बीमा दस्तावेज, मालिक और ऑपरेटर की जानकारी सहित पूरी यात्रा योजना शामिल होगी।

इसके अलावा जहाज पर मौजूद खतरनाक या विस्फोटक सामग्री की जानकारी भी देना अनिवार्य होगा। सभी विवरणों के सत्यापन के बाद ही अनुमति जारी की जाएगी।

शुरुआती 60 दिन तक नहीं लगेगा कोई शुल्क

ईरान ने घोषणा की है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद शुरुआती 60 दिनों तक जहाजों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस अवधि में सुरक्षा, नौवहन सहायता, पर्यावरण संरक्षण और बीमा जैसी सेवाओं का खर्च सरकार स्वयं वहन करेगी।

हालांकि ईरान ने संकेत दिया है कि भविष्य में इन सेवाओं के लिए शुल्क लगाया जा सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।

एक बार के लिए मान्य होगा परमिट

अनुमति मिलने के बाद जहाज को विशेष परमिट जारी किया जाएगा। यह परमिट केवल एक बार के पारगमन के लिए वैध होगा और अधिकतम पांच दिनों तक प्रभावी रहेगा। यदि जहाज निर्धारित समय सीमा में यात्रा पूरी नहीं करता है तो परमिट स्वतः समाप्त हो जाएगा और उसे दोबारा आवेदन करना होगा।

तय मार्ग से हटने पर होगी कार्रवाई

ईरान ने जहाजों के लिए एक निश्चित समुद्री मार्ग निर्धारित किया है, जो लारक द्वीप के आसपास से होकर गुजरता है। पीजीएसए ने स्पष्ट किया है कि इस निर्धारित मार्ग से हटकर यात्रा करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

ऐसी स्थिति में किसी भी प्रकार की दुर्घटना, नुकसान या दंड की पूरी जिम्मेदारी जहाज के मालिक और कप्तान की होगी।

भारत समेत दुनिया की नजर

India अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से पूरा करता है और बड़ी मात्रा में कच्चा तेल होर्मुज मार्ग से होकर आता है। ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर लागू होने वाला हर नया नियम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आयात लागत को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल नई व्यवस्था से समुद्री यातायात को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है, लेकिन यदि भविष्य में शुल्क और अतिरिक्त नियम लागू किए गए तो वैश्विक शिपिंग लागत बढ़ सकती है। यही वजह है कि भारत के साथ-साथ China, Japan और यूरोपीय देशों की भी इस नई प्रणाली पर करीबी नजर बनी हुई है।

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