“अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में गठित तीन सदस्यीय SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। जांच में कई खामियां सामने आई हैं। करीब 150 लोगों के बयान दर्ज किए गए और दानपात्रों की चाबियां चालक के पास मिलने से नए सवाल खड़े हो गए हैं।“
लखनऊ/अयोध्या। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की राशि से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच कर रही तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। मंगलवार को एसआईटी ने अपनी जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को प्रस्तुत की। हालांकि शासन की ओर से स्पष्ट किया गया है कि जांच प्रक्रिया अभी जारी है और इसे अंतिम रिपोर्ट नहीं माना जाएगा।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण सामने आने के बाद राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल का गठन किया था। एसआईटी ने बीते दिनों व्यापक स्तर पर दस्तावेजों की जांच, पूछताछ और वित्तीय रिकॉर्ड का परीक्षण किया।

15 जून से शुरू हुई थी जांच
सरकारी सूत्रों के अनुसार सात जून को मामला सामने आने के बाद गठित एसआईटी ने 15 जून से औपचारिक जांच शुरू की थी। जांच के दौरान मंदिर प्रशासन, ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों, बैंकिंग व्यवस्था और चढ़ावे के संग्रहण एवं गणना प्रणाली की गहन समीक्षा की गई।
एसआईटी ने मंदिर के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र तथा व्यवस्थापक गोपाल राव सहित कई जिम्मेदार पदाधिकारियों से बातचीत कर व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। इसके अलावा दानपात्रों से प्राप्त नकदी की गणना प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था का भी परीक्षण किया गया।
डेढ़ सौ से अधिक लोगों के बयान दर्ज
जांच के दौरान मंदिर प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, बैंकिंग प्रक्रिया और नकदी प्रबंधन से जुड़े लगभग 150 लोगों के बयान दर्ज किए गए। एसआईटी ने विभिन्न स्तरों पर कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ कर तथ्यों का मिलान किया।
सूत्रों के अनुसार चंपत राय के पूर्व चालक रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र के बयानों का भी विस्तृत परीक्षण किया गया। बयानों में कथित विसंगतियां मिलने पर दोनों से लगातार कई दिनों तक पूछताछ की गई।
14 लोगों के लिखित बयान लिए गए
जांच के दौरान कुछ व्यक्तियों को संदिग्ध मानते हुए उनके लिखित बयान भी दर्ज किए गए। इनमें अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी, सुभाष श्रीवास्तव समेत ट्रस्ट और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े कुल 14 लोगों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
एसआईटी ने इन सभी से वित्तीय प्रक्रियाओं, दानपात्र संचालन और नकदी जमा करने की प्रणाली के संबंध में जानकारी जुटाई।
दानपात्रों की चाबियों को लेकर उठे सवाल
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों में सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक दानपात्रों की चाबियों का प्रबंधन रहा। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी को जांच के दौरान यह जानकारी मिली कि दानपात्रों की चाबियां रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास थीं।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि दानपात्रों के संचालन और निगरानी की अधिकृत व्यवस्था क्या थी तथा निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा था या नहीं।
कई व्यवस्थागत खामियों की चर्चा
सूत्रों के अनुसार छह दिनों की जांच के दौरान एसआईटी को चढ़ावा संग्रहण, निगरानी और लेखा-प्रबंधन व्यवस्था में कई प्रकार की प्रक्रियागत कमियां और खामियां मिली हैं। हालांकि रिपोर्ट की आधिकारिक सामग्री अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच अभी प्रचलित है और रिपोर्ट के अध्ययन के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या होगा?
एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद अब शासन स्तर पर इसकी समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता, प्रशासनिक लापरवाही या प्रक्रियागत उल्लंघन की पुष्टि होती है तो आगे कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार और जांच एजेंसियां फिलहाल रिपोर्ट के निष्कर्षों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रही हैं।
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