जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय मंत्री पद से दिया इस्तीफा, जानिए कौन हैं बीजेपी के वरिष्ठ नेता

मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन ने राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद इस्तीफा दे दिया है। 1980 से बीजेपी से जुड़े कुरियन केरल के वरिष्ठ नेता हैं और 2024 में मोदी कैबिनेट में शामिल किए गए थे। जानिए उनका राजनीतिक सफर और इस्तीफे की पूरी कहानी।

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका था और पार्टी ने उन्हें दोबारा उच्च सदन के लिए नामित नहीं किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा केवल एक संवैधानिक प्रक्रिया भर नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे भाजपा की दक्षिण भारत, विशेषकर केरल की राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

कौन हैं जॉर्ज कुरियन?

65 वर्षीय जॉर्ज कुरियन केरल के कोट्टायम जिले के रहने वाले हैं। पेशे से वकील कुरियन लंबे समय से भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा से जुड़े रहे हैं। वे उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने केरल जैसे चुनौतीपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र में भाजपा को मजबूत करने के लिए दशकों तक काम किया।

टीवी चैनलों की राजनीतिक बहसों में भी वे भाजपा के प्रमुख प्रवक्ता के रूप में सक्रिय रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के केरल दौरों के दौरान उनके भाषणों का मलयालम में अनुवाद करने की जिम्मेदारी भी अक्सर जॉर्ज कुरियन निभाते रहे हैं।

भाजपा के गठन के समय से जुड़े

जॉर्ज कुरियन उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हैं जो वर्ष 1980 में भाजपा की स्थापना के समय से ही पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। पिछले 46 वर्षों में उन्होंने संगठन के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।

उन्होंने—

  • भाजपा केरल इकाई के महासचिव के रूप में कार्य किया।
  • भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के राष्ट्रीय सचिव रहे।
  • भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे।
  • संगठनात्मक विस्तार और अल्पसंख्यक समुदायों तक पहुंच बढ़ाने में भूमिका निभाई।

मोदी कैबिनेट में क्यों मिला था स्थान?

वर्ष 2024 में नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दौरान जॉर्ज कुरियन को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केरल और ईसाई समुदाय के बीच भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा था।

कुरियन का संबंध केरल के प्रभावशाली सिरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से माना जाता है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को भाजपा के अल्पसंख्यक संपर्क अभियान के महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा गया था।

चुनावी राजनीति में भी रहे सक्रिय

जॉर्ज कुरियन केवल संगठनात्मक नेता ही नहीं रहे, बल्कि उन्होंने चुनावी राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 2016 के केरल विधानसभा चुनाव में उन्होंने पुथुपल्ली सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता और तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

हालांकि इस चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने भाजपा की उपस्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वाजपेयी सरकार में भी निभाई थी जिम्मेदारी

पूर्व केंद्रीय मंत्री ओ. राजगोपाल जब अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री थे, तब जॉर्ज कुरियन उनके ‘ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी’ (OSD) के रूप में कार्य कर चुके हैं। इस दौरान उन्हें केंद्र सरकार के प्रशासनिक और राजनीतिक कार्यों का भी अनुभव मिला।

राज्यसभा में क्यों नहीं मिला दूसरा मौका?

जॉर्ज कुरियन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य थे। उनका छह वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने के बाद भाजपा ने इस बार उन्हें दोबारा नामित नहीं किया। पार्टी ने मध्य प्रदेश से तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को राज्यसभा भेजने का फैसला किया।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि केरल में हाल के चुनावों में भाजपा के अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने के कारण संगठन ने नई रणनीति के तहत नेतृत्व में बदलाव का फैसला किया है। हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।

मुख्तार अब्बास नकवी जैसा मामला

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार जॉर्ज कुरियन का मामला पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी से मिलता-जुलता है। नकवी को भी राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद मंत्री पद छोड़ना पड़ा था, क्योंकि उन्हें दोबारा उच्च सदन के लिए नामित नहीं किया गया था।

विवरणजानकारी
नामजॉर्ज कुरियन
आयु65 वर्ष
गृह राज्यकेरल
पेशाअधिवक्ता
भाजपा से जुड़ाव1980 से
केंद्रीय मंत्री बने2024
राज्यसभा सदस्यमध्य प्रदेश से
प्रमुख पहचानभाजपा का केरल और ईसाई समुदाय में प्रमुख चेहरा
इस्तीफे का कारणराज्यसभा कार्यकाल समाप्त, पुनर्नामांकन नहीं

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