“अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा गबन मामले के बाद दान गणना और नकदी प्रबंधन के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। अब CCTV की निगरानी, अलग कंट्रोल रूम, त्रिस्तरीय जांच, वीडियो रिकॉर्डिंग और कर्मियों की सघन तलाशी अनिवार्य होगी।“
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावा राशि से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच के बीच मंदिर प्रशासन ने दान गणना और नकदी प्रबंधन व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए हैं। अब दानपात्रों से नकदी निकालने से लेकर बैंक में जमा कराने तक पूरी प्रक्रिया कड़ी निगरानी और बहुस्तरीय सत्यापन के दायरे में होगी।
सूत्रों के अनुसार विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में वित्तीय निगरानी और सुरक्षा व्यवस्थाओं में कई खामियां सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य दान राशि के संग्रहण, गणना और जमा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।
CCTV निगरानी के लिए अलग कंट्रोल रूम
राम मंदिर परिसर के यात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) स्थित गणना कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरों के लिए अब अलग कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। इस कंट्रोल रूम का एक्सेस केवल मंदिर प्रशासन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस को भी इसकी निगरानी का अधिकार दिया गया है।
अधिकारियों का मानना है कि दोहरे स्तर की निगरानी से किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ की संभावना कम होगी।
दानपात्र से बैंक तक हर कदम की होगी रिकॉर्डिंग
नई व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में स्थापित सभी दानपात्रों और नकद जमा काउंटरों को सीसीटीवी निगरानी में लाया गया है। दानपात्रों से नकदी निकालने, उसे गणना कक्ष तक ले जाने और बैंक तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी।
इससे प्रत्येक चरण का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा और किसी भी विवाद की स्थिति में साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।
नकदी जमा करने में त्रिस्तरीय जांच
दान राशि को बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया भी अब पहले से अधिक सख्त कर दी गई है। नकदी को सील करने और बैंक भेजने से पहले तीन अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा उसका मिलान और क्रॉस-चेक किया जाएगा।
सत्यापन के बाद संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर लिए जाएंगे। बैंक में पहुंचने पर भी राशि का पुनः मिलान किया जाएगा ताकि रास्ते में किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो सके।
गणना कर्मियों की होगी सघन तलाशी
एसआईटी जांच में यह तथ्य सामने आने की चर्चा है कि गणना कक्ष से निकलने वाले कर्मियों की पर्याप्त जांच नहीं होती थी। इसके बाद अब गणना प्रक्रिया में शामिल सभी कर्मियों की प्रवेश और निकास दोनों समय शत-प्रतिशत तलाशी अनिवार्य कर दी गई है।
इस व्यवस्था में ट्रस्ट, बैंक और सहयोगी एजेंसियों के कर्मचारियों पर समान नियम लागू होंगे।
जांच में मिली थीं कई खामियां
सूत्रों के अनुसार छह दिनों की जांच के दौरान एसआईटी को वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था से संबंधित कई प्रक्रियागत कमियां मिली थीं। बताया जा रहा है कि पर्याप्त निगरानी और जवाबदेही के अभाव में दान राशि के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर जांच पूरी होने से पहले ही सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में सुधार लागू कर दिए गए हैं।
कर्मियों में बदलाव की भी चर्चा
मंदिर में दान गणना कार्य से जुड़े ट्रस्ट, बैंक और एजेंसी कर्मियों में बदलाव की भी चर्चा है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एसबीआई के स्थानीय शाखा प्रबंधक ने संकेत दिया है कि भविष्य में कर्मियों में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी। सूत्रों का कहना है कि एसआईटी जांच पूरी होने और आगे की कार्रवाई तय होने तक किसी बड़े प्रशासनिक परिवर्तन की संभावना कम है।
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