“बहराइच में सात वर्षीय मासूम से कुकर्म के बाद हत्या के मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने दोषी मुकेश निषाद को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इसे विरल से विरलतम अपराध बताते हुए एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। मामले की सुनवाई 72 दिनों में पूरी हुई।“
बहराइच। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में सात वर्षीय मासूम बालक से कुकर्म के बाद हत्या करने के मामले में विशेष पॉक्सो कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। विशेष अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अरविंद कुमार गौतम की अदालत ने दोषी मुकेश निषाद को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है।
अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि मृतक बालक के पिता को प्रतिकर के रूप में देने का आदेश दिया गया है। इस मामले में अदालत ने घटना के महज 72 दिनों के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया।
12 मई को हुई थी दिल दहला देने वाली घटना
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 12 मई को कैसरगंज थाना क्षेत्र के एक गांव की है। गांव में एक विवाह समारोह आयोजित था, जिसमें मझारा तौकली के दयालपुरवा निवासी मुकेश निषाद भी शामिल होने आया था।
आरोप है कि आरोपी ने मौका पाकर सात वर्षीय बालक को गांव के बाहर झाड़ियों की ओर ले गया और उसके साथ कुकर्म किया। घटना की जानकारी सामने आने के डर से आरोपी ने मासूम की हत्या कर शव झाड़ियों में फेंक दिया।
झाड़ियों में मिला था मासूम का शव
जब बालक घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद गांव के बाहर झाड़ियों में मासूम का शव बरामद हुआ।
शुरुआत में घटना पुलिस के लिए एक पहेली बनी हुई थी। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर मुकेश निषाद को चिन्हित किया और उसे गिरफ्तार कर लिया।
वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत हुआ मामला
पुलिस जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने कुकर्म के बाद हत्या करने की बात स्वीकार की।
पुलिस ने करीब एक महीने की विवेचना पूरी कर 12 जून को अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। इसके बाद अदालत में 42 दिनों तक मामले की सुनवाई चली।
42 दिनों तक चली कोर्ट की सुनवाई
सुनवाई के दौरान अदालत ने मृतक के पिता, चिकित्सक, एफआईआर दर्ज करने वाले अधिकारी, विवेचक समेत अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए।
अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष जिला शासकीय अधिवक्ता पॉक्सो संत प्रताप सिंह और विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह ने मामले की पैरवी की।
सभी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई।
‘विरल से विरलतम अपराध है यह कृत्य’
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि दोषी का अपराध विरल से विरलतम श्रेणी का है। उसका कृत्य न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि मानवता के विरुद्ध भी है।
अदालत ने टिप्पणी की कि मासूम बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराध समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे अपराधों में कठोरतम दंड देकर समाज में कानून के प्रति विश्वास कायम रखना जरूरी है।
दोषी को फांसी देने का आदेश
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दोषी को गर्दन में फांसी का फंदा लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।
कोर्ट के इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। वहीं, पुलिस और अभियोजन पक्ष ने कम समय में प्रभावी पैरवी कर दोषी को सजा दिलाने को बड़ी उपलब्धि बताया है।
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