“पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी गुट ने बड़ा कदम उठाते हुए अभिषेक बनर्जी को सस्पेंड कर दिया है। नई कमेटी में अरूप रॉय को चेयरमैन बनाया गया है। इस बीच अभिषेक बनर्जी पर अम्फान राहत फंड मामले में नई FIR भी दर्ज हुई है।“
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष अब खुलकर सामने आ गया है। कोलकाता में आयोजित बागी नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के असंतुष्ट गुट ने अभिषेक बनर्जी को निलंबित करने का दावा करते हुए नई संगठनात्मक समिति के गठन की घोषणा की है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
सूत्रों के अनुसार न्यू टाउन स्थित एक होटल में आयोजित बैठक में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कई बागी विधायक, पूर्व जनप्रतिनिधि और पूर्व पार्षद शामिल हुए। बैठक में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए संगठन में व्यापक बदलाव की घोषणा की गई।
अरूप रॉय को बनाया गया नया चेयरमैन
बैठक में गठित नई समिति में हावड़ा सेंट्रल से विधायक अरूप रॉय को चेयरमैन नियुक्त किए जाने का दावा किया गया। वहीं जावेद खान, संदीपन साहा, रीताब्रत बनर्जी और सबीना यास्मीन को महासचिव बनाया गया है। अख्तरुज्जमां को कोषाध्यक्ष तथा अरूप बिस्वास, फिरहाद हकीम और रथिन घोष को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बागी नेताओं का कहना है कि संगठन में लंबे समय से चल रही असंतोष की स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
अभिषेक बनर्जी के निलंबन का दावा
बैठक में मौजूद नेताओं ने दावा किया कि संगठन के भीतर शिकायतों और मतभेदों को देखते हुए अभिषेक बनर्जी को पार्टी से निलंबित करने का निर्णय लिया गया। हालांकि इस निर्णय को लेकर आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यदि यह विवाद और गहराता है तो पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
पहले से चल रहा था नेतृत्व विवाद
जानकारों के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद पिछले कुछ समय से बढ़ रहे थे। विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन को लेकर भी विवाद सामने आया था। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया था कि उनके हस्ताक्षरों का दुरुपयोग किया गया। बाद में यह मामला न्यायालय तक पहुंचा और राजनीतिक खींचतान और तेज हो गई।
इसी विवाद के बाद कई नेता धीरे-धीरे बागी खेमे के साथ आते दिखाई दिए।
अभिषेक पर कानूनी दबाव भी बढ़ा
इसी बीच अभिषेक बनर्जी के खिलाफ फाल्टा थाने में एक नई एफआईआर दर्ज कराए जाने का दावा किया गया है। शिकायत में अम्फान राहत कोष के वितरण में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।
भाजपा नेता अभिजीत दास उर्फ बॉबी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत में राहत राशि के वितरण में गड़बड़ी और लाभार्थियों की सूची में अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
हालांकि इन आरोपों पर अभिषेक बनर्जी या उनके प्रतिनिधियों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल
तृणमूल कांग्रेस के भीतर सामने आए इस ताजा घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर संघर्ष तेज होता दिखाई दे रहा है, वहीं दूसरी ओर कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां भी बढ़ती नजर आ रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस विवाद का असर राज्य की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस की संगठनात्मक स्थिति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।
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