“लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में जान गंवाने वाले सीतापुर निवासी आदित्य श्रीवास्तव का शव गांव पहुंचते ही मातम छा गया। सदमे में डूबे पिता मुखाग्नि नहीं दे सके और ताऊ ने अंतिम संस्कार किया। बहन और मां का रो-रोकर बुरा हाल है। जानिए इस दर्दनाक हादसे की पूरी कहानी।“
बिसवां/लखनऊ। लखनऊ के अलीगंज स्थित एनीमेशन एवं कोचिंग सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड ने जहां 15 परिवारों के सपने छीन लिए, वहीं सीतापुर के बिसवां निवासी आदित्य श्रीवास्तव की मौत ने पूरे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया। मंगलवार सुबह जब आदित्य का शव गांव पहुंचा तो घर में चीख-पुकार मच गई। मां, बहन और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे गांव की आंखें नम थीं। अंतिम संस्कार के समय पिता आलोक श्रीवास्तव अपने बेटे को मुखाग्नि देने की स्थिति में नहीं थे। गहरे सदमे में डूबे पिता बार-बार बेसुध हो रहे थे, जिसके बाद आदित्य के ताऊ राजन श्रीवास्तव ने उन्हें मुखाग्नि दी।
‘भाई को बचा नहीं पाई’ कहकर फूट-फूट कर रोई बहन
आदित्य की बहन की आंखों में अपने भाई को खोने का दर्द साफ दिखाई दे रहा था। वह बार-बार यही कह रही थी कि वह भी उसी इलाके में मौजूद थी, लेकिन अपने भाई तक नहीं पहुंच सकी। बिलखते हुए उसने कहा कि वहां मौजूद हर छात्र और कर्मचारी अपने भविष्य के सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत कर रहा था। किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही मिनटों में सब कुछ खत्म हो जाएगा।
परिजनों के मुताबिक आदित्य उस संस्थान में पढ़ाई करने के साथ-साथ पढ़ाने का काम भी करता था। परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थीं। उसकी मेहनत और लगन की चर्चा पूरे इलाके में होती थी।
अधिवक्ता पिता और शिक्षामित्र मां का उजड़ गया संसार
आदित्य के पिता आलोक श्रीवास्तव पेशे से अधिवक्ता हैं, जबकि मां कल्पना श्रीवास्तव प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र हैं। परिवार में दो बहनें और एक छोटा भाई है। बड़ी बहन मेधा की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बहन निष्ठा बीएससी की पढ़ाई कर रही है। छोटा भाई धैर्य अभी स्कूल में पढ़ता है।
परिवार के लोगों का कहना है कि आदित्य हमेशा घर की जिम्मेदारियों को समझता था और अपने करियर को लेकर गंभीर था। उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है।
गांव में उमड़ा जनसैलाब, जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धांजलि
आदित्य के अंतिम दर्शन के लिए पूरे गांव के लोग उमड़ पड़े। शोक व्यक्त करने के लिए बिसवां विधायक निर्मल वर्मा, सेउता विधायक ज्ञान तिवारी, पूर्व विधायक महेंद्र सिंह यादव सहित कई जनप्रतिनिधि पहुंचे। सभी ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
पूर्व विधायक महेंद्र सिंह यादव ने कहा कि ऐसे अवैध और असुरक्षित कोचिंग सेंटरों पर कड़ी निगरानी की जरूरत है ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी त्रासदी न झेलनी पड़े।
जन्मदिन की खुशियां कुछ मिनटों में मातम में बदलीं
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे से कुछ देर पहले संस्थान में एक छात्र का जन्मदिन मनाया जा रहा था। छात्र-छात्राएं खुशियों के माहौल में थे, लेकिन अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते धुआं पूरी इमारत में फैल गया और लोग बाहर निकलने के लिए संघर्ष करने लगे।
हादसे में बच गए डालीगंज निवासी भुवन ने बताया कि कुछ ही देर पहले तक सभी साथी हंसी-खुशी मौजूद थे। आग लगने के बाद सीढ़ियों की तरफ भागे, लेकिन घना धुआं रास्ता रोक चुका था। कई लोग ऊपर ही फंस गए।
“पापा, शायद आज मैं नहीं बच पाऊंगा”
इस हादसे की सबसे मार्मिक कहानियों में जयंत गुप्ता की कहानी भी शामिल है। तीसरी मंजिल पर फंसे जयंत ने अपने पिता को फोन कर कहा, “पापा, शायद आज मैं नहीं बच पाऊंगा।” यह सुनकर परिवार के होश उड़ गए। हालांकि जयंत ने हिम्मत दिखाई और तीसरी मंजिल से छलांग लगाकर जान बचा ली। इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें खतरे से बाहर बताया है।
अवैध निर्माण और लापरवाही पर उठे सवाल
हादसे के बाद जांच में सामने आया है कि जिस भवन में एनीमेशन सेंटर संचालित हो रहा था, उसका स्वीकृत मानचित्र आवासीय उपयोग के लिए था, जबकि उसमें व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही थीं। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी इस तथ्य की पुष्टि की है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वर्षों से चल रही इस गतिविधि पर संबंधित विभागों की नजर क्यों नहीं पड़ी। बिजली विभाग द्वारा व्यावसायिक गतिविधियों के अनुरूप प्रक्रिया पूरी किए बिना कनेक्शन दिए जाने की भी जांच हो रही है।
चार गिरफ्तार, चार अधिकारी निलंबित, एसआईटी कर रही जांच
मामले में पुलिस ने भवन मालिक, संचालक और अन्य जिम्मेदार लोगों समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एलडीए, ऊर्जा विभाग और फायर विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने हादसे की जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी प्रवीण कुमार के नेतृत्व में गठित टीम को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम भी घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने में लगी है।
15 घरों के बुझ गए चिराग
अलीगंज अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी, प्रशासनिक लापरवाही और अवैध निर्माण की भयावह कीमत बनकर सामने आया है। इस त्रासदी ने 15 परिवारों के चिराग बुझा दिए और अनगिनत सपनों को राख में बदल दिया। अब पीड़ित परिवारों की निगाहें जांच और न्याय पर टिकी हैं।
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