“समाजवादी पार्टी के विधायक कमाल अख्तर ने मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दे दिया है। सांसद रुचि वीरा ने इसे व्यक्तिगत विवाद से जोड़ने से इनकार करते हुए 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति का हिस्सा बताया। उन्होंने राम मंदिर चंदा मामले की जांच और प्रदेश के बुनियादी मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।“
मुरादाबाद/लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और कांठ विधानसभा सीट से विधायक कमाल अख्तर के मुख्य सचेतक पद से इस्तीफे ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। मुरादाबाद से लेकर लखनऊ तक सियासी गलियारों में इस फैसले के मायने तलाशे जा रहे हैं। खासकर ऐसे समय में जब हाल ही में मुरादाबाद में आयोजित पीडीए सम्मेलन को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद सामने आए थे।
कमाल अख्तर ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दिया है। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व का निर्णय सर्वोपरि होता है और संगठन के आदेश का पालन करना हर कार्यकर्ता और पदाधिकारी का दायित्व है।
पीडीए सम्मेलन के बाद बढ़ी थीं अटकलें
बीते दिनों मुरादाबाद में आयोजित पीडीए सम्मेलन के दौरान सांसद रुचि वीरा की कथित अनदेखी और कार्यक्रम के पोस्टरों में उनकी तस्वीर नहीं लगाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। इस मुद्दे ने राजनीतिक और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना लिया था।
बताया जाता है कि इस मामले को लेकर पार्टी नेतृत्व तक शिकायत पहुंची थी, जिसके बाद अखिलेश यादव ने हस्तक्षेप करते हुए दोनों नेताओं के साथ बैठक की थी। इसके कुछ ही दिनों बाद कमाल अख्तर के इस्तीफे ने अटकलों को और हवा दे दी।
रुचि वीरा ने कहा- इसे निजी विवाद से न जोड़ा जाए
मुरादाबाद से सांसद रुचि वीरा ने कमाल अख्तर के इस्तीफे को व्यक्तिगत मतभेद या किसी की राजनीतिक जीत-हार से जोड़ने से साफ इनकार किया है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी हुई है और संगठनात्मक स्तर पर किए जा रहे बदलाव उसी रणनीति का हिस्सा हैं।
उनका कहना था कि पार्टी में किसे कौन-सी जिम्मेदारी दी जाएगी और किस पद पर कौन कार्य करेगा, इसका निर्णय केवल राष्ट्रीय अध्यक्ष का विशेषाधिकार है। ऐसे फैसलों को व्यक्तिगत रिश्तों और स्थानीय विवादों के नजरिए से देखना उचित नहीं है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष के हस्तक्षेप से सुलझा था विवाद
रुचि वीरा ने कहा कि पीडीए सम्मेलन के दौरान फोटो और निमंत्रण को लेकर जो विवाद सामने आया था, वह अब अतीत की बात है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद मामला सुलझ चुका है और पार्टी पूरी एकजुटता के साथ आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी का लक्ष्य भाजपा को राजनीतिक रूप से चुनौती देना और जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाना है।
भाजपा से संपर्क की अफवाहों को किया खारिज
सांसद ने सोशल मीडिया पर चल रही उन चर्चाओं को भी खारिज कर दिया, जिनमें उनके भाजपा नेताओं के संपर्क में होने की बातें कही जा रही थीं। उन्होंने इन दावों को निराधार और राजनीतिक अफवाह बताते हुए कहा कि उनका पूरा राजनीतिक जीवन समाजवादी विचारधारा और पार्टी के प्रति समर्पित रहा है।
उन्होंने ओम प्रकाश राजभर के बयानों को भी महत्व देने से इनकार किया और कहा कि विपक्षी दलों का उद्देश्य केवल भ्रम फैलाना है।
राम मंदिर चंदे और जनसमस्याओं पर सरकार को घेरा
रुचि वीरा ने बातचीत के दौरान राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराए जाने की मांग की।
इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में बिजली संकट, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों को उठाते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना था कि सरकार को जनता की बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
‘बाबरी सोच’ वाले बयान पर भी किया पलटवार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया ‘बाबरी सोच’ संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए रुचि वीरा ने कहा कि ऐसे बयान इतिहास की अधूरी समझ को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता विकास, रोजगार और बेहतर सुविधाओं के मुद्दों पर फैसला करेगी।
2027 में मुरादाबाद की सभी सीटें जीतने का दावा
रुचि वीरा ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी मुरादाबाद जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ जनता के बीच काम कर रहे हैं और भाजपा के खिलाफ मजबूत जनसमर्थन तैयार हो रहा है।
कमाल अख्तर के इस्तीफे के बाद भले ही राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया हो, लेकिन समाजवादी पार्टी इसे संगठनात्मक पुनर्गठन और चुनावी तैयारी का हिस्सा बताकर किसी भी तरह के अंदरूनी टकराव की अटकलों को खारिज कर रही है।
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