दिल्ली को मिलेगी छह लेन की द्वारका टनल, यूपी में बनेगा 242 किमी लंबा हाईवे; ₹14,115 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी

केंद्र सरकार ने दिल्ली में 6 लेन की द्वारका टनल और उत्तर प्रदेश में कानपुर से कबरई तक 242 किलोमीटर लंबे चार लेन हाईवे परियोजना को मंजूरी दी है। दोनों परियोजनाओं पर कुल ₹14,115 करोड़ खर्च होंगे।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश के बुनियादी ढांचे को नई गति देने के उद्देश्य से दिल्ली और उत्तर प्रदेश के लिए दो बड़ी सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कुल ₹14,115 करोड़ की लागत वाली इन परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की है।

इनमें राजधानी दिल्ली में छह लेन की द्वारका टनल और उत्तर प्रदेश में कानपुर से कबरई तक चार लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे का निर्माण शामिल है।

दिल्ली में बनेगी 8.1 किलोमीटर लंबी छह लेन टनल

दिल्ली में प्रस्तावित यह परियोजना द्वारका एक्सप्रेसवे पर स्थित शिवमूर्ति इंटरचेंज को नेल्सन मंडेला मार्ग से सीधे जोड़ेगी। कुल 8.1 किलोमीटर लंबी इस परियोजना का लगभग 3.1 किलोमीटर हिस्सा सदर्न रिज क्षेत्र के नीचे भूमिगत टनल के रूप में बनाया जाएगा।

इस परियोजना पर लगभग ₹6,970 करोड़ की लागत आएगी और इसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित किया जाएगा। सरकार ने इसके निर्माण की समय-सीमा पांच वर्ष निर्धारित की है।

पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली के बीच सफर होगा आसान

टनल बनने के बाद पश्चिमी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के बीच यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे ट्रैफिक दबाव कम होगा और एयरपोर्ट तथा प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंच पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक होगी।

यूपी में बनेगा 242 किलोमीटर लंबा हाईवे

केंद्रीय कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में कानपुर से कबरई तक 242 किलोमीटर लंबे चार लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना पर लगभग ₹7,145 करोड़ खर्च किए जाएंगे।

यह हाईवे भोपाल-कानपुर आर्थिक गलियारा का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा और इसे BOT (Build-Operate-Transfer) टोल मॉडल पर विकसित किया जाएगा।

इन जिलों को मिलेगा सीधा फायदा

यह परियोजना विशेष रूप से कानपुर, हमीरपुर और महोबा जिलों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बेहतर सड़क संपर्क से व्यापार, पर्यटन, उद्योग और कृषि गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बुंदेलखंड क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

अर्थव्यवस्था और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बढ़ावा

दोनों परियोजनाएं सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार कार्यक्रम का हिस्सा हैं। इनके पूरा होने के बाद माल परिवहन की लागत कम होगी, यात्रा समय घटेगा और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।

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