यूपी में बिना नोटिस बढ़ाया जा रहा बिजली उपभोक्ताओं का लोड, स्मार्ट मीटर पर उठे सवाल

उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं ने बिना पूर्व सूचना बिजली लोड बढ़ाए जाने का आरोप लगाया है। स्मार्ट मीटर और बढ़ी हुई बिजली डिमांड के आधार पर लोड संशोधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जानिए क्या कहते हैं नियम और उपभोक्ताओं की शिकायतें।

लखनऊ। प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर पहले से असंतोष झेल रहे बिजली उपभोक्ताओं के सामने अब एक नई समस्या खड़ी हो गई है। आरोप है कि बिजली विभाग बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित सहमति के उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन का स्वीकृत लोड बढ़ा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें केवल एक संदेश भेजकर लोड बढ़ाने की जानकारी दी जा रही है, जिससे उनके बिजली बिल और स्थायी शुल्क पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

उपभोक्ताओं का आरोप है कि विद्युत वितरण कंपनियां निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। सामान्यतः किसी उपभोक्ता के कनेक्शन का लोड बढ़ाने की प्रक्रिया तब अपनाई जाती है, जब उसकी वास्तविक मांग लगातार तीन माह तक स्वीकृत क्षमता से अधिक दर्ज की जाए। इसके बाद विभाग उपभोक्ता को नोटिस जारी कर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करता है। हालांकि कई मामलों में केवल एक या दो माह की अधिक खपत के आधार पर ही लोड बढ़ाने की कार्रवाई की जा रही है।

बिजली उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर प्रणाली के माध्यम से उनकी अधिकतम बिजली मांग का आंकलन कर स्वचालित रूप से लोड बढ़ाने का निर्णय लिया जा रहा है, जबकि इसके लिए उपभोक्ताओं को पहले सूचना देना और उनकी आपत्तियां सुनना आवश्यक है। अचानक बढ़े लोड का सीधा असर फिक्स चार्ज और अन्य शुल्कों पर पड़ता है, जिससे मासिक बिल में वृद्धि हो जाती है।

उपभोक्ताओं ने इस मामले में विभागीय दोहरे मानदंडों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बड़े वाणिज्यिक या औद्योगिक कनेक्शनों के मामलों में कई महीनों तक अधिक लोड उपयोग के बावजूद केवल अतिरिक्त शुल्क या पेनाल्टी ली जाती है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं के मामले में अपेक्षाकृत कम अवधि की अधिक खपत पर ही लोड बढ़ा दिया जा रहा है।

एक उपभोक्ता ने आरोप लगाया कि उनके पांच किलोवाट के कनेक्शन पर कई महीनों तक बिजली मांग निर्धारित सीमा के भीतर रही, जबकि केवल एक अवधि में अधिकतम मांग 6.55 किलोवाट पहुंचने के बाद विभाग ने उनका लोड एक किलोवाट बढ़ा दिया। इसी प्रकार कई अन्य उपभोक्ताओं ने भी बिना पूर्व सूचना लोड बढ़ाए जाने की शिकायत की है।

जानकारों के अनुसार, किसी भी उपभोक्ता के स्वीकृत भार में बदलाव करने से पहले उसे नोटिस देना, कारण बताना और आवश्यक प्रक्रिया का पालन करना उपभोक्ता हितों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यदि यह प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से नहीं अपनाई जाती है, तो इससे उपभोक्ताओं और विभाग के बीच विवाद बढ़ सकते हैं।

बिजली उपभोक्ता संगठनों ने मांग की है कि विभाग लोड वृद्धि के लिए स्पष्ट और पारदर्शी नीति अपनाए तथा उपभोक्ताओं को पर्याप्त समय और जानकारी उपलब्ध कराए। साथ ही ऐसे मामलों की समीक्षा की जाए, जहां निर्धारित प्रक्रिया पूरी किए बिना लोड बढ़ाया गया है।

उधर, विभाग की ओर से इस मुद्दे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। यदि उपभोक्ताओं की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो यह मामला स्मार्ट मीटर प्रणाली और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ी बड़ी बहस का विषय बन सकता है।

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