“उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन के बीच खाद की उपलब्धता को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी और किसान नेताओं ने खाद की किल्लत और कालाबाजारी का आरोप लगाया है, जबकि योगी सरकार ने पर्याप्त स्टॉक होने और किसानों को समय पर खाद मिलने का दावा किया है।“
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान किसानों के लिए खाद की उपलब्धता एक बार फिर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने प्रदेश में यूरिया और डीएपी की किल्लत का आरोप लगाते हुए सरकार को घेरा है। वहीं भारतीय किसान यूनियन ने भी कई जिलों में किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में खड़े होने और कालाबाजारी का आरोप लगाया है। दूसरी ओर योगी सरकार ने विपक्ष के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि प्रदेश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
अखिलेश यादव ने चुनाव से जोड़ा खाद का मुद्दा
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंचाने और धान की बुवाई सुचारू रूप से कराने में सफल रहती है तो विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय पर 2027 में होंगे। लेकिन यदि खाद संकट गहराता है और किसानों में व्यापक असंतोष पैदा होता है तो भाजपा समय से पहले चुनाव कराने का फैसला भी ले सकती है।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई हिस्सों में किसान खाद के लिए लंबी कतारों में खड़े होने को मजबूर हैं, जिससे खेती प्रभावित हो रही है।
राकेश टिकैत ने उठाया कालाबाजारी का मुद्दा
भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी खाद की उपलब्धता पर सवाल उठाते हुए किसानों से संघर्ष के लिए तैयार रहने की अपील की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच पर गोंडा जिले की तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि किसान घंटों लाइन में लगने को मजबूर हैं।
टिकैत का आरोप है कि कई स्थानों पर यूरिया और डीएपी निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बेची जा रही है। उन्होंने कहा कि धान की रोपाई के महत्वपूर्ण समय में किसानों को खाद के लिए परेशान होना पड़ रहा है, जबकि सरकार इस समस्या के समाधान के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रही।
सरकार का पलटवार, विपक्ष पर राजनीति का आरोप
प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है और सरकार किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल में किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ता था और कई स्थानों पर विवाद की घटनाएं सामने आती थीं, लेकिन वर्तमान सरकार में ऐसी स्थिति नहीं है।
सरकार ने बताए खाद के उपलब्ध स्टॉक
कृषि मंत्री के अनुसार प्रदेश में वर्तमान समय में—
- यूरिया : लगभग 5.95 लाख मीट्रिक टन
- डीएपी : लगभग 3.91 लाख मीट्रिक टन
- एनपीके : लगभग 3.01 लाख मीट्रिक टन
का स्टॉक उपलब्ध है। हालांकि जुलाई 2026 तक का जिलावार स्टॉक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद खरीदें और यदि कहीं कालाबाजारी, अधिक कीमत वसूली या कृत्रिम संकट की जानकारी मिले तो तत्काल कृषि विभाग को शिकायत दें।
आधार सत्यापन के बाद मिलती है सब्सिडी वाली खाद
सरकारी व्यवस्था के तहत किसानों को अधिकृत उर्वरक केंद्र पर आधार कार्ड अथवा अन्य पहचान पत्र के साथ जाना होता है। वहां पॉइंट ऑफ सेल (PoS) मशीन के माध्यम से आधार आधारित सत्यापन किया जाता है। सत्यापन पूरा होने के बाद किसानों को निर्धारित मात्रा में सब्सिडी वाली खाद उपलब्ध कराई जाती है तथा खरीद की रसीद भी दी जाती है।
कैसे होती है यूरिया और डीएपी की आपूर्ति
उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान यूरिया और डीएपी की मांग सबसे अधिक रहती है। उर्वरकों का आवंटन केंद्र सरकार करती है, जबकि राज्य सरकार जिलों, सहकारी समितियों और अधिकृत विक्रेताओं के माध्यम से किसानों तक इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
प्रदेश में मुख्य रूप से IFFCO, KRIBHCO, NFL और RCF जैसी उर्वरक कंपनियां यूरिया और डीएपी की आपूर्ति करती हैं।
कितनी खाद की होती है जरूरत
कृषि विभाग के मानकों के अनुसार सरकार प्रति किसान निश्चित संख्या में खाद की बोरियां तय नहीं करती। आवश्यकता फसल और बोए गए क्षेत्र के आधार पर निर्धारित होती है।
सामान्य परिस्थितियों में—
- धान और गेहूं की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 100 किलोग्राम डीएपी
- तथा 250 से 300 किलोग्राम यूरिया
की आवश्यकता मानी जाती है। हालांकि अंतिम मात्रा मिट्टी परीक्षण और फसल की वास्तविक जरूरत के आधार पर तय की जाती है।
चुनावी मुद्दा बनता खाद संकट
उत्तर प्रदेश में किसान सबसे बड़ा मतदाता वर्ग माना जाता है। ऐसे में खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता केवल कृषि का नहीं बल्कि राजनीतिक महत्व का भी विषय बन गई है। विपक्ष इसे किसानों की बदहाली का मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार पर्याप्त स्टॉक और सुचारु वितरण व्यवस्था का दावा कर किसानों का भरोसा बनाए रखने का प्रयास कर रही है। आने वाले दिनों में खाद की उपलब्धता और वितरण की स्थिति प्रदेश की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकती है।
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