राम मंदिर चंदा ‘चोरी’ विवाद.: VHP अध्यक्ष ने DSP को लिखा पत्र, केजरीवाल-प्रियंका समेत विपक्षी नेताओं के बयानों की जांच की मांग

राम मंदिर दान ‘चंदा चोरी’ विवाद में VHP अध्यक्ष ने DSP को पत्र लिखकर केजरीवाल, प्रियंका गांधी, राम गोपाल यादव और संजय सिंह के बयानों की जांच की मांग की। विपक्षी आरोपों को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ा।

नई दिल्ली/अयोध्या। राम मंदिर दान को लेकर लगाए जा रहे कथित “चंदा चोरी” और “घोटाले” के आरोपों ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस मामले में अयोध्या के डीएसपी आशीष तिवारी को पत्र लिखकर विपक्षी नेताओं द्वारा दिए गए बयानों की जांच की मांग की है।

अपने पत्र में आलोक कुमार ने कहा है कि विभिन्न राजनीतिक नेताओं—अरविंद केजरीवाल, प्रियंका गांधी वाड्रा, राम गोपाल यादव और संजय सिंह—द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के पीछे मौजूद तथ्यों और सबूतों की जांच जरूरी है। उन्होंने पुलिस से यह भी आग्रह किया है कि इन नेताओं के बयानों के स्रोत और आधार की स्पष्टता सुनिश्चित की जाए।

वीएचपी अध्यक्ष ने लिखा है कि यदि इन आरोपों के पीछे कोई ठोस सबूत मौजूद हैं, तो वे जांच एजेंसियों को सच्चाई तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं। लेकिन यदि ये आरोप बिना किसी तथ्यात्मक आधार के लगाए गए हैं, तो यह गंभीर विषय है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जाना चाहिए।

पत्र में यह भी कहा गया है कि समाज में भ्रम फैलाने या संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले निराधार आरोपों को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

कौन-कौन से बयान बने विवाद की वजह

पत्र में जिन बयानों का उल्लेख किया गया है, उनमें समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव का वह दावा शामिल है जिसमें उन्होंने राम मंदिर निर्माण और दान प्रक्रिया में करीब 20,000 करोड़ रुपये तक के कथित घोटाले का आरोप लगाया था।

अरविंद केजरीवाल के बयान का हवाला देते हुए कहा गया कि उन्होंने करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक के दान और चढ़ावे में गड़बड़ी का आरोप लगाया था और निष्पक्ष जांच की मांग की थी।

सांसद संजय सिंह पर भी लगभग 200 करोड़ रुपये की कथित चोरी और कर्मचारियों की संलिप्तता के आरोप लगाने का उल्लेख किया गया है।

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान में सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने और पारदर्शिता की मांग का संदर्भ दिया गया है।

राजनीतिक सरगर्मी तेज
इस पूरे विवाद ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर जहां विपक्ष पारदर्शिता और जांच की मांग कर रहा है, वहीं VHP इसे बिना सबूत लगाए गए गंभीर आरोप बताकर कानूनी कार्रवाई की बात कर रही है।

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