“श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के 44 साल के इतिहास में करीब 12 वर्ष तक स्थायी अध्यक्ष नहीं रहा। अब तक केवल पांच लोगों को अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। वर्तमान में 18 महीने से अधिक समय से अध्यक्ष पद खाली है और नई न्यास परिषद का गठन लंबित है।“
वाराणसी। विश्व प्रसिद्ध श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का 44 वर्षों का इतिहास स्थायी अध्यक्ष के लंबे इंतजार का भी गवाह रहा है। वर्ष 1983 में गठित मंदिर न्यास अब तक करीब 12 साल ऐसे दौर से गुजर चुका है, जब अध्यक्ष का पद स्थायी रूप से खाली रहा। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्यवाहक व्यवस्था के तहत जिम्मेदारी संभाली।
न्यास के गठन से लेकर अब तक केवल पांच लोगों को ही स्थायी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया है। वर्तमान स्थिति यह है कि पिछले 18 महीने से अधिक समय से अध्यक्ष पद रिक्त है और नई न्यास परिषद के गठन का इंतजार किया जा रहा है।
चार बार हुई नियुक्ति में देरी
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के इतिहास में वर्ष 1983 से 2026 के बीच चार बार ऐसी स्थिति बनी, जब अध्यक्ष और नामित सदस्यों की नियुक्ति में देरी हुई। मंदिर प्रशासन की ओर से दिसंबर 2024 में न्यास परिषद का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही संभावित अध्यक्ष और पांच नामित सदस्यों के नाम शासन को भेज दिए गए थे, लेकिन अब तक नई परिषद का गठन नहीं हो सका है।
वर्तमान में न्यास में केवल चार पदेन सदस्य ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिनमें तीन प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।
काशी नरेश से शुरू हुआ अध्यक्षों का सफर
वर्ष 1983 से 2002 तक काशी नरेश डॉ. विभूति नारायण सिंह श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के अध्यक्ष रहे। उनके निधन के बाद वर्ष 2002 में मध्य प्रदेश के सेवानिवृत्त अधिकारी टीपी तिवारी को अध्यक्ष बनाया गया, लेकिन उन्होंने कुछ ही समय बाद पद से इस्तीफा दे दिया।
इसके बाद वर्ष 2009 तक अध्यक्ष पद खाली रहा और मंडलायुक्त कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाते रहे।
2009 के बाद फिर शुरू हुई स्थायी नियुक्ति
वर्ष 2009 में प्रदेश सरकार ने पंडित हरिहर कृपालु त्रिपाठी को तीन वर्ष के लिए न्यास अध्यक्ष नियुक्त किया। उनका कार्यकाल वर्ष 2012 में समाप्त होने के बाद करीब डेढ़ साल तक पद खाली रहा।
इसके बाद वर्ष 2013 में पंडित अशोक द्विवेदी को अध्यक्ष बनाया गया। वह इससे पहले वर्ष 2003 में न्यास के सदस्य भी रह चुके थे। वर्ष 2016 में उन्हें दोबारा अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। उनका कार्यकाल 2019 में समाप्त हुआ।
वर्ष 2021 में प्रो. नागेंद्र पांडेय को न्यास अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद से अब तक स्थायी अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है।
“न्यास परिषद का होना जरूरी” : प्रो. नागेंद्र पांडेय
पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने कहा कि मंदिर न्यास परिषद का सक्रिय होना जरूरी है। अध्यक्ष और सदस्यों की मौजूदगी में ही कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर सहमति बनती है। उन्होंने कहा कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम-1983 के नियमों के पालन के लिए भी परिषद का गठन आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि अध्यक्ष का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से वह मंदिर दर्शन के लिए भी नहीं गए हैं।
मंदिर के कामकाज पर असर नहीं : सीईओ
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विश्वभूषण मिश्रा ने कहा कि न्यास परिषद का कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही संभावित सदस्यों के नाम शासन को भेज दिए गए थे। मंदिर से जुड़े सभी कार्य नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में शासन स्तर पर लगातार पत्राचार किया गया है और अब निर्णय का इंतजार है।
नई परिषद के गठन का इंतजार
काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और लगातार बढ़ रहे विकास कार्यों के बीच स्थायी न्यास परिषद की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंदिर प्रशासन, धार्मिक मामलों और भविष्य की योजनाओं के लिए अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति लंबे समय से लंबित है।
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