विक्रम-1 की सफल उड़ान पर पीएम मोदी ने स्काईरूट टीम को दी बधाई, बोले- ‘आपने देश के युवाओं को प्रेरित किया’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट की सफल लॉन्चिंग पर टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि बताते हुए युवाओं की क्षमता पर भरोसा जताया।

नई दिल्ली। भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में नई उपलब्धि हासिल होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को बधाई दी है। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 के सफल प्रक्षेपण के बाद पीएम मोदी ने टीम से फोन पर बातचीत की और इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व का क्षण बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सिर्फ एक लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी के नए युग का आगमन है। उन्होंने मिशन को ‘मिशन आगमन’ बताते हुए कहा कि इस सफलता को आगे और नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।

‘आपकी टीम में युवा दिख रहे हैं, यह देखकर खुशी हुई’

स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों और टीम से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूरी टीम में युवा चेहरे दिखाई दे रहे हैं, जो देश के लिए उत्साहजनक है।

उन्होंने कहा, “सबसे पहले स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को बधाई। मैं इस सफलता से बहुत आनंदित हूं। आपकी पूरी टीम 20-30 साल की उम्र की दिखती है, यह देखकर मुझे और खुशी हो रही है।”

पीएम मोदी ने कहा कि शुरुआती दौर में टीम के चेहरों पर चिंता नजर आ रही थी, लेकिन सफल लॉन्च के बाद वही चेहरे खुशी से भरे दिखाई दिए। उन्होंने पूरी टीम के प्रयासों और मेहनत की सराहना की।

निजी स्पेस सेक्टर को लेकर फैसला सही साबित हुआ: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने का निर्णय लिया था, तब कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं। लेकिन स्काईरूट जैसी कंपनियों ने साबित कर दिया कि देश के युवा अवसर मिलने पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “आपने मेरे उस निर्णय को ताकत दी है। अब मेरी टीम भी मानेगी कि देश के नौजवानों पर भरोसा करना चाहिए। उन्हें अवसर देना चाहिए और वे करके दिखाते हैं।”

विक्रम-1 के साथ अंतरिक्ष में पहुंचा ‘वंदे मातरम’ संदेश

स्काईरूट टीम के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने विक्रम-1 के साथ ‘वंदे मातरम’ लिखा हुआ पोस्टकार्ड भी भेजा था। यह मिशन राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर से भी जुड़ा है।

स्काईरूट एयरोस्पेस के सीईओ पवन कुमार चंदाना ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा भेजा गया संदेश सफलतापूर्वक ऑर्बिट तक पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल स्काईरूट और भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अंतरिक्ष इंडस्ट्री के लिए ऐतिहासिक क्षण है।

पूरी तरह भारत में तैयार हुआ विक्रम-1

विक्रम-1 को पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। यह एडवांस्ड कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना तीन चरणों वाला सॉलिड-फ्यूल लॉन्च व्हीकल है।

रॉकेट में एक लिक्विड-फ्यूल ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल (OAM) भी लगाया गया है, जो उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षा में स्थापित करने में मदद करता है।

450 किलोमीटर लो-अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाया पेलोड

‘मिशन आगमन’ के तहत करीब 23 मीटर ऊंचे और 1.7 मीटर चौड़े विक्रम-1 रॉकेट ने श्रीहरिकोटा के पहले लॉन्च पैड से दोपहर 12:05 बजे उड़ान भरी।

रॉकेट ने अपने पेलोड को लगभग 450 किलोमीटर की लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में सफलतापूर्वक पहुंचाया। इस उपलब्धि के साथ भारत निजी क्षेत्र से विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल बनाने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है।

छोटे उपग्रहों के वैश्विक बाजार पर नजर

विक्रम-1 को छोटे उपग्रहों के प्रक्षेपण के लिए तैयार किया गया है। यह अर्थ ऑब्जर्वेशन, कम्युनिकेशन, वैज्ञानिक प्रयोगों और टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन मिशन के लिए उपयोगी होगा।

रॉकेट को लो-अर्थ ऑर्बिट में करीब 350 किलोग्राम और सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में लगभग 260 किलोग्राम तक वजन पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।

भारत के कमर्शियल स्पेस सेक्टर में नया अध्याय

विक्रम-1 की सफलता को भारत के कमर्शियल स्पेस सेक्टर के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे निजी कंपनियों के लिए अंतरिक्ष बाजार में नए अवसर खुलेंगे और भारत वैश्विक लॉन्च सेवाओं में अपनी भागीदारी बढ़ा सकेगा।

“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button