“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को सभी विभागों के सचिवों के साथ अहम बैठक करेंगे। सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव से निपटने और विकसित भारत के लक्ष्य को गति देने के लिए बड़े सुधारों की तैयारी में है।“
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संकट से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को तेज गति देने के लिए केंद्र सरकार बड़े सुधारों की तैयारी में जुट गई है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सभी मंत्रालयों के सचिवों की अहम बैठक बुलाई है। बैठक में सचिव अपने-अपने विभागों से जुड़े सुधारों और चुनौतियों पर प्रस्तुतीकरण देंगे।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री के निर्देश पर सचिवों को पहले ही तीन महत्वपूर्ण टास्क दिए गए हैं। इन्हीं बिंदुओं को बैठक के मुख्य एजेंडे में शामिल किया गया है।
सचिवों को दिए गए तीन बड़े टास्क
सूत्रों के अनुसार, पहला टास्क है कि सचिव अपने विभाग के लक्ष्यों को पूरा करने में आ रही बाधाओं की पहचान करें और उन्हें दूर करने के लिए ठोस सुझाव दें। इसमें प्रशासनिक अड़चनों, नीतिगत चुनौतियों और कार्यप्रणाली में सुधार के उपायों पर चर्चा होगी।
दूसरा टास्क है कि सचिव अपने विभाग की सीमाओं से आगे बढ़कर दूसरे मंत्रालयों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर काम करने के सुझाव दें। सरकार का मानना है कि कई बड़े सुधार केवल एक मंत्रालय के प्रयास से संभव नहीं हैं।
तीसरे टास्क के तहत सचिवों से कहा गया है कि वे अपने विभाग के सुधारों के अलावा अन्य मंत्रालयों के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए भी सुझाव दें।
ईरान-अमेरिका तनाव के बाद बने थे सात समूह
फरवरी के अंत में ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और आपूर्ति व्यवस्था पर असर को देखते हुए कैबिनेट सचिव ने विभिन्न सचिवों की अध्यक्षता में सात समूहों का गठन किया था।
इन समूहों ने अपनी रिपोर्ट कैबिनेट सचिव को सौंप दी है। अब मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने इन रिपोर्टों का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा।
इन समूहों का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन, महंगाई नियंत्रण, आयात-निर्यात, रक्षा निर्माण और आर्थिक स्थिरता जैसे अहम क्षेत्रों में सुधार के सुझाव देना है।
ऊर्जा, महंगाई और सप्लाई चेन पर विशेष जोर
आर्थिक मामलों से जुड़े समूह की अध्यक्षता आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर कर रही हैं। इस समूह में 11 सदस्य शामिल हैं। यह समूह देश की व्यापक आर्थिक स्थिति को मजबूत करने, मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और आयात-निर्यात व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़े सुझाव देगा।
वहीं पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल के नेतृत्व वाला समूह एलएनजी, एलपीजी, पेट्रोलियम उत्पादों और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री को सुझाव देगा। इस समूह में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के प्रमुख भी शामिल हैं।
इसके अलावा विदेश नीति, रक्षा निर्माण और लॉजिस्टिक विकास को लेकर भी अलग-अलग सचिवों के समूह बनाए गए हैं।
मैन्युफैक्चरिंग और निवेश बढ़ाने पर सरकार का फोकस
सरकार का मानना है कि पिछले दस वर्षों में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में कई सुधार हुए हैं, लेकिन अभी भी निवेशकों को उद्योग लगाने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
सूत्रों के अनुसार, बेहतर सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक व्यवस्था के जरिए उत्पादन लागत को कम करने और भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में नए कदम उठाए जा सकते हैं।
शिपिंग सचिव विजय कुमार के नेतृत्व वाला समूह देश में लॉजिस्टिक नेटवर्क को मजबूत करने की रणनीति तैयार कर रहा है।
रिफॉर्म के अगले चरण की तैयारी
मंगलवार की बैठक में सचिवों के प्रस्तुतीकरण के आधार पर सरकार आर्थिक सुधारों के अगले चरण की रूपरेखा तैयार करेगी। माना जा रहा है कि बैठक में वैश्विक संकटों से निपटने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और भारत की आर्थिक मजबूती को लेकर कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”








