“पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कोयला खदान में मीथेन गैस विस्फोट से कम से कम 32 मजदूरों की मौत हो गई। 10 खनिक अब भी फंसे हैं। बचाव दल 4,000 फीट गहराई में राहत अभियान चला रहा है।“
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में गुरुवार को एक बड़ा खदान हादसा हो गया। राजधानी क्वेटा के बाहरी इलाके में स्थित एक कोयला खदान में मीथेन गैस के कारण हुए भीषण विस्फोट में कम से कम 32 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य खनिक अब भी खदान के भीतर फंसे हुए हैं। राहत एवं बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं, हालांकि अधिकारियों ने जीवित बचने की संभावना बेहद कम बताई है।
विस्फोट के समय खदान में मौजूद थे 36 मजदूर
बलूचिस्तान के खान एवं खनिज विकास मंत्री शोएब नोशेरवानी के अनुसार, विस्फोट के समय खदान के ढहे हुए हिस्से में 36 मजदूर काम कर रहे थे। धमाके के तुरंत बाद राहत अभियान शुरू किया गया। शुरुआती चरण में सात शव निकाले गए, जबकि बाद में मलबे से 25 और शव बरामद किए गए।
मीथेन गैस बनी हादसे की वजह
सरकारी खान निरीक्षक अब्दुल गनी बलोच ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह खदान के भीतर मीथेन गैस का अत्यधिक जमाव सामने आया है। गैस में विस्फोट होने से खदान का बड़ा हिस्सा ढह गया और पास-पास स्थित दो कोयला खदानों को भी भारी नुकसान पहुंचा।
विशेषज्ञों के अनुसार, मीथेन गैस विस्फोट के बाद खदान के भीतर ऑक्सीजन का स्तर लगभग शून्य हो जाता है, जिससे अंदर फंसे लोगों के जीवित बचने की संभावना काफी कम हो जाती है।
4,000 फीट गहराई में जारी है बचाव अभियान
प्रांत के मुख्य खान निरीक्षक मुहम्मद आतिफ ने बताया कि राहत दल लगभग 4,000 फीट (करीब 1,219 मीटर) की गहराई में फंसे मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के जीवित मिलने की उम्मीद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हैं।
खनन सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस हादसे के बाद पाकिस्तान में खनन सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बलूचिस्तान में कोयला खदानों में मीथेन गैस, अपर्याप्त वेंटिलेशन और सुरक्षा उपकरणों की कमी के कारण पहले भी कई बड़े हादसे हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन और आधुनिक निगरानी व्यवस्था लागू किए बिना ऐसे हादसों पर रोक लगाना मुश्किल होगा।
सरकार ने जांच के दिए निर्देश
पाकिस्तानी प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि राहत अभियान पूरा होने के बाद विस्फोट के कारणों की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे मजदूरों तक पहुंचने और बचाव अभियान को तेजी से पूरा करने की है।
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