“भारत के लिए जरूरी सामान लेकर आ रहे मालवाहक जहाज पर समुद्री लुटेरों ने हमला किया, लेकिन भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS त्रिशूल और MARCOS कमांडो ने समय रहते कार्रवाई कर जहाज और क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बचा लिया।“
नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने एक बार फिर अपनी तत्परता और क्षमता का परिचय देते हुए भारत की ओर आ रहे एक मालवाहक जहाज को समुद्री डाकुओं के हमले से सुरक्षित बचा लिया। समुद्री लुटेरों द्वारा जहाज को निशाना बनाने की कोशिश को युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल की त्वरित कार्रवाई ने विफल कर दिया।
जानकारी के अनुसार भारत के लिए आवश्यक सामान लेकर आ रहे मालवाहक जहाज एमवी गोल्डन आर्सेनल पर बुधवार रात समुद्री डाकुओं ने हमला करने का प्रयास किया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय नौसेना ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और क्षेत्र में तैनात युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल को जहाज की ओर रवाना किया।
क्रू मेंबर्स ने खुद को सुरक्षित कमरे में किया बंद
हमले के दौरान जहाज पर मौजूद क्रू मेंबर्स ने सूझबूझ का परिचय देते हुए खुद को जहाज के सुरक्षित कक्ष (सेफ रूम) में बंद कर लिया और आपात संचार माध्यमों के जरिए सहायता की गुहार लगाई। जहाज पर एक भारतीय नागरिक समेत कई विदेशी क्रू सदस्य मौजूद थे।
जैसे ही भारतीय नौसेना का युद्धपोत घटनास्थल के करीब पहुंचा, समुद्री डाकू वहां से फरार हो गए।
MARCOS कमांडो ने जहाज को किया सुरक्षित
घटना के बाद भारतीय नौसेना के विशेष मरीन कमांडो बल MARCOS के जवानों ने जहाज पर चढ़कर विस्तृत तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान जहाज को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया गया और सभी क्रू मेंबर्स की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
नौसेना के सूत्रों के मुताबिक किसी भी क्रू सदस्य को नुकसान नहीं पहुंचा है और जहाज अपनी निर्धारित यात्रा जारी रखने की स्थिति में है।
दो महीने पहले भी नाकाम की थी समुद्री डकैती
यह पहला मौका नहीं है जब भारतीय नौसेना ने समुद्री डाकुओं के मंसूबों को विफल किया हो। इससे पहले 26 मई 2026 को भी पश्चिमी हिंद महासागर में मालवाहक जहाज एमवी माशाअल्लाह-1 के पास संदिग्ध समुद्री गतिविधियों का पता चलने पर भारतीय नौसेना ने तत्काल कार्रवाई की थी।
उस समय युद्धपोत आईएनएस कोलकाता और उसके हेलिकॉप्टर ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ाकर संभावित हमले को टाल दिया था।
2008 से अदन की खाड़ी में सक्रिय है भारतीय नौसेना
समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय नौसेना वर्ष 2008 से अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार एंटी-पाइरेसी मिशन चला रही है। इस अभियान के तहत भारतीय युद्धपोत अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और समुद्री डकैती की घटनाओं पर नजर रखते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय नौसैनिक मौजूदगी न केवल भारतीय व्यापारिक हितों की रक्षा कर रही है, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
समुद्री सुरक्षा में बढ़ी भारत की भूमिका
हाल के वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती, हथियारों और अवैध तस्करी की गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे में भारतीय नौसेना की त्वरित और प्रभावी कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भारत अपने समुद्री हितों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर परिस्थिति में तैयार है।
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