“संसद के मानसून सत्र 2026 के तीसरे सप्ताह में विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग, FCRA बिल, राम मंदिर चंदा विवाद और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं केंद्र सरकार MSME, जजों की संख्या बढ़ाने समेत कई अहम विधेयकों को पारित कराने की रणनीति पर काम कर रही है। पढ़ें संसद की पूरी राजनीतिक अपडेट।“
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र का तीसरा सप्ताह सोमवार से शुरू हो रहा है। पहले दो सप्ताह तक लगातार हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार बाधित रही। अब नए सप्ताह में भी सदन के भीतर तीखी राजनीतिक टक्कर देखने की संभावना है। कांग्रेस गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को प्रमुख मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की तैयारी कर रही है, जबकि केंद्र सरकार अपने विधायी एजेंडे को पूरा करने के लिए पूरी रणनीति के साथ मैदान में उतर रही है।
शुरुआती दो सप्ताह हंगामे की भेंट
मानसून सत्र के पहले सप्ताह में छात्र आंदोलन और उससे जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष ने दोनों सदनों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। लगातार हंगामे के चलते संसद की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी और अधिकांश समय कोई महत्वपूर्ण विधायी कार्य नहीं हो सका।
दूसरे सप्ताह में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक माहौल में बदलाव जरूर आया, लेकिन कांग्रेस ने सरकार पर हमले जारी रखे। हालांकि अन्य विपक्षी दलों ने हर मुद्दे पर कांग्रेस का साथ नहीं दिया। इसी बीच सरकार ने पेपर लीक रोधी विधेयक और वंदे मातरम से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक को संसद से पारित कराने में सफलता हासिल की।
अमित शाह के इस्तीफे की मांग पर कांग्रेस आक्रामक
संसद के तीसरे सप्ताह में कांग्रेस का मुख्य फोकस गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफा रहेगा। पार्टी इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरने की तैयारी में है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष के सभी दल इस मांग पर एकमत नहीं हैं, जिससे कांग्रेस को व्यापक समर्थन मिलने की संभावना सीमित दिखाई देती है।
FCRA बिल पर भी बढ़ सकता है टकराव
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) से जुड़े प्रस्तावित संशोधन भी संसद में विवाद का कारण बन सकते हैं। विपक्ष का मानना है कि इस विधेयक के कई प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा आवश्यक है, जबकि सरकार इसे जल्द पारित कराना चाहती है। ऐसे में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस की संभावना है।
राम मंदिर चंदा विवाद भी बनेगा बड़ा मुद्दा
कांग्रेस ने राम मंदिर चंदा मामले को भी संसद में उठाने का फैसला किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) से कराई जानी चाहिए। विपक्ष इस मुद्दे को सदन के भीतर प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर चुका है।
सरकार का फोकस विधायी एजेंडा पूरा करना
सरकार संसद का समय बर्बाद नहीं होने देना चाहती। सूत्रों के अनुसार सरकार का लक्ष्य इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना है। इनमें MSME से जुड़ा विधेयक, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक और अन्य प्रशासनिक सुधारों से जुड़े प्रस्ताव प्रमुख हैं।
सरकार की रणनीति यह भी है कि यदि विपक्ष लगातार हंगामा करता है, तब भी संसदीय नियमों के तहत आवश्यक विधायी कार्यों को आगे बढ़ाया जाए।
इस सप्ताह क्यों रहेगा महत्वपूर्ण?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद का यह सप्ताह सरकार और विपक्ष दोनों के लिए बेहद अहम होगा। विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की कोशिश करेगा, जबकि सरकार विकास और विधायी कार्यों को प्राथमिकता देते हुए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगी। ऐसे में संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।
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