
यूपी में दिव्यांग बच्चों के लिए अगस्त से अक्टूबर के बीच 225 एक्सपोजर विजिट आयोजित की जाएंगी। सभी 75 जिलों में तीन-तीन भ्रमण होंगे। प्रत्येक विजिट में 50 बच्चे शामिल होंगे और सुरक्षित व सुगम्य स्थानों का चयन किया जाएगा।
लखनऊ। पढ़ाई केवल किताबों और कक्षा की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसी उद्देश्य से अब उत्तर प्रदेश के दिव्यांग बच्चों को भी कक्षा से बाहर की दुनिया को करीब से देखने और उससे सीखने का अवसर मिलेगा। समग्र शिक्षा के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में अगस्त से अक्टूबर के बीच एक्सपोजर विजिट आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक जिले में तीन भ्रमण कार्यक्रम होंगे। इस तरह प्रदेशभर में कुल 225 एक्सपोजर विजिट कराई जाएंगी।
इन भ्रमण कार्यक्रमों में प्रत्येक बार 50 दिव्यांग बच्चों को शामिल किया जाएगा। इसके लिए हर जिले को 1.50 लाख रुपये की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। एक एक्सपोजर विजिट पर अधिकतम 50 हजार रुपये खर्च किए जा सकेंगे। शासन की मंशा है कि इन भ्रमणों के माध्यम से बच्चे अपने आसपास की दुनिया, ऐतिहासिक स्थलों और विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षिक गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकें।
अलग-अलग दिव्यांगताओं वाले बच्चों को मिलेगा मौका
समग्र शिक्षा राज्य परियोजना निदेशालय की ओर से सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें स्पष्ट किया गया है कि बच्चों का चयन करते समय इस बात का ध्यान रखा जाए कि अलग-अलग प्रकार की दिव्यांगताओं वाले विद्यार्थियों को भी भ्रमण में शामिल होने का अवसर मिले।
इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों को घूमाना नहीं, बल्कि उनके सीखने के अनुभव को व्यापक बनाना है। कक्षा में पढ़ाई गई चीजों को वास्तविक जीवन और आसपास के वातावरण से जोड़ने में ऐसे भ्रमण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अभिभावकों की लिखित सहमति अनिवार्य
दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भ्रमण में शामिल करने से पहले उनके माता-पिता या अभिभावक की लिखित सहमति लेना अनिवार्य किया गया है। बच्चों को छोटे-छोटे समूहों में बांटकर भ्रमण कराया जाएगा।
प्रत्येक समूह की सुरक्षा और सहयोग की जिम्मेदारी स्पेशल एजुकेटर्स की होगी। इससे भ्रमण के दौरान बच्चों की जरूरतों का ध्यान रखने के साथ उनकी सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
सुरक्षित और सुगम्य स्थानों का होगा चयन
एक्सपोजर विजिट के लिए ऐसे स्थानों का चयन किया जाएगा जो बच्चों के लिए सुरक्षित और सुगम्य होने के साथ-साथ उनके ज्ञान और समझ को बढ़ाने वाले हों। जिले या आसपास के जिलों में स्थित उपयुक्त स्थलों को भ्रमण के लिए चुना जा सकेगा।
ऐतिहासिक स्थल भी एक्सपोजर विजिट के लिए चयनित किए जा सकते हैं। इससे बच्चे इतिहास और विरासत से जुड़ी चीजों को किताबों में पढ़ने के बजाय उन्हें प्रत्यक्ष रूप से देखकर समझ सकेंगे।
दिव्यांगता दिवस पर भी होंगे कार्यक्रम
दिव्यांग बच्चों के लिए केवल एक्सपोजर विजिट ही नहीं, बल्कि तीन दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगता दिवस के अवसर पर जिलों में विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके लिए प्रत्येक जिले को एक लाख रुपये की दर से कुल 75 लाख रुपये जारी किए जा रहे हैं।
इन कार्यक्रमों के माध्यम से दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा और क्षमताओं को सामने लाने के साथ उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा।
खेलकूद प्रतियोगिताओं की भी तैयार होगी कार्ययोजना
समग्र शिक्षा के तहत ब्लॉक और तहसील स्तर पर आयोजित खेलकूद प्रतियोगिताओं में चयनित दिव्यांग बच्चों के लिए जनपद स्तरीय प्रतियोगिताएं कराने की भी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल और अन्य गतिविधियों में अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर उपलब्ध कराना है।
इस पूरी पहल के जरिए सरकार दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को अधिक अनुभवात्मक और समावेशी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। एक्सपोजर विजिट, खेलकूद और विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को कक्षा के बाहर सीखने, नए अनुभव हासिल करने और आत्मविश्वास बढ़ाने का अवसर मिलेगा।








