मॉनसून सत्र का आखिरी दिन: हंगामे और टकराव के बीच लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित

संसद का मॉनसून सत्र 2026 खत्म हो गया। आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। NEET छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच पूरे सत्र में गतिरोध बना रहा।

नई दिल्ली। संसद का मॉनसून सत्र गुरुवार को हंगामे और सत्ता पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी के बीच समाप्त हो गया। लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने जहां छात्र आंदोलनों, पुलिस कार्रवाई और अन्य मामलों पर सदन में चर्चा की मांग की, वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।

मॉनसून सत्र के लिए कुल 19 बैठकें निर्धारित की गई थीं। हालांकि कई मौकों पर हंगामे और विरोध के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई। इसके बावजूद सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विधेयक सदन से पारित कराए गए।

NEET छात्र आंदोलन को लेकर संसद में गरमाया माहौल

मॉनसून सत्र के अंतिम दिनों में NEET परीक्षा को लेकर हुए छात्र आंदोलन का मुद्दा भी संसद में प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा। विपक्षी सांसदों का कहना था कि छात्रों के मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।

बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर NEET परीक्षा को लेकर हुए छात्र आंदोलन पर सदन में चर्चा कराने का आग्रह किया था। हालांकि विपक्ष ने इस पहल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को यह मुद्दा सदन में सीधे उठाना चाहिए था।

विपक्ष बोला- गृह मंत्री सदन में आकर दें जवाब

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि गृह मंत्री चर्चा के लिए तैयार हैं तो उन्हें सदन में आकर इसकी जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि सदन के बाहर पत्र लिखने के बजाय सरकार को संसद के भीतर चर्चा क्यों नहीं करनी चाहिए।

वेणुगोपाल ने सदन की कार्यवाही बाधित होने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप था कि विपक्ष लगातार चर्चा की मांग करता रहा, लेकिन सरकार ने गंभीर मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं कराई।

पेलेट गन के इस्तेमाल पर भी विपक्ष ने मांगा जवाब

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने प्रदर्शनकारियों पर कथित पेलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार से यह जानना चाहता था कि पेलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया।

उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए था। विपक्ष का कहना था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर संसद में चर्चा जरूरी है।

महुआ मोइत्रा ने सत्ता पक्ष पर साधा निशाना

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने संसद परिसर में सत्ता पक्ष के विरोध-प्रदर्शन को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सत्ता में रहने वाली सरकार का विपक्ष के खिलाफ संसद परिसर में नारेबाजी करना असामान्य स्थिति है।

उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की सदन में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए। महुआ मोइत्रा ने कहा कि सत्र के दौरान विपक्ष लगातार सदन में चर्चा की मांग करता रहा।

संसद परिसर में विपक्ष का अनोखा प्रदर्शन

मॉनसून सत्र के अंतिम दिन संसद परिसर में कांग्रेस सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने एक खिलौना बंदर लेकर नारेबाजी की।

विपक्षी सांसदों ने इस प्रदर्शन के जरिए प्रधानमंत्री और सरकार पर संसद में विपक्ष की आवाज नहीं सुनने का आरोप लगाया। आखिरी दिन भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच यह राजनीतिक तकरार देखने को मिली।

गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर किया पलटवार

वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए उन पर संसद की कार्यवाही को अपने तरीके से चलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संसद संसदीय प्रक्रियाओं और नियमों के अनुसार चलती है।

गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर विपक्ष के नेता के तौर पर हंगामा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि केवल चुनौती देने से संसद की कार्यवाही नहीं चलती। उन्होंने विपक्ष के रवैये की आलोचना की।

सरकार-विपक्ष के बीच पूरे सत्र में बना रहा गतिरोध

मॉनसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार गतिरोध रहा। विपक्ष ने विभिन्न मामलों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने के आरोप लगाए गए।

संसद के भीतर हंगामे के साथ-साथ कई मौकों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने संसद परिसर में भी विरोध-प्रदर्शन किया। इसके कारण सत्र का राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ा रहा।

हंगामे के बावजूद कई महत्वपूर्ण विधेयक हुए पारित

हालांकि संसद की कार्यवाही कई बार बाधित हुई, लेकिन सरकार ने मॉनसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया। सरकार की ओर से इसे विधायी कामकाज की उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया।

विपक्ष का कहना रहा कि विधेयकों पर पर्याप्त चर्चा और महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर विस्तृत बहस होनी चाहिए थी। इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद पूरे सत्र में बने रहे।

आखिरी दिन भी नहीं थमा राजनीतिक टकराव

गुरुवार को जब दोनों सदनों की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई तो राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी रहा। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने एक-दूसरे पर सदन की कार्यवाही बाधित करने के आरोप लगाए।

इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। इसके साथ ही मॉनसून सत्र का औपचारिक समापन हो गया।

अब आगे क्या होगा?

मॉनसून सत्र के समाप्त होने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच उठे मुद्दों पर राजनीतिक बहस जारी रहने की संभावना है। खासकर NEET छात्र आंदोलन, प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और संसद में चर्चा को लेकर बने गतिरोध को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं।

सत्र के दौरान हुए हंगामे और विरोध-प्रदर्शन ने एक बार फिर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच संवाद तथा महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा की जरूरत को सामने रखा है। अब नजर इस बात पर होगी कि आने वाले समय में इन मुद्दों को लेकर सरकार और विपक्ष किस तरह आगे बढ़ते हैं।

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