बनारस का क्रांतिकारियों का गांव करखियांव संवरेगा, 26 सेनानियों की स्मृति में बनेगा भव्य म्यूरल पार्क

वाराणसी के करखियांव गांव को स्वतंत्रता संग्राम सर्किट के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। 18.26 करोड़ रुपये की लागत से 26 स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में म्यूरल पार्क, स्मृति स्तंभ और आधुनिक पर्यटन सुविधाएं विकसित होंगी।

वाराणसी। स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले गुमनाम और वीर सेनानियों की स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने वाराणसी के ऐतिहासिक करखियांव गांव को संवारने की पहल की है। पिंडरा विकासखंड स्थित करखियांव को स्वतंत्रता संग्राम सर्किट के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां करीब 18.26 करोड़ रुपये की लागत से फ्रीडम फाइटर मेमोरियल पार्क और स्मृति एवं पर्यटन परिसर का विकास किया जा रहा है।

करखियांव को वाराणसी में सर्वाधिक स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों वाले गांवों में प्रमुख स्थान प्राप्त है। वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक गांव के लोगों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

26 सेनानियों की स्मृति में बनेगा म्यूरल पार्क

परियोजना की सबसे खास विशेषता 26 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति में विकसित किया जा रहा भव्य म्यूरल पार्क होगा। इन सेनानियों के योगदान और बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए परिसर में 26 स्मृति स्तंभ स्थापित किए जाएंगे।

इसके अलावा 12 इंटरप्रिटेशन वाल बनाई जाएंगी। इन पर स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों के साथ वाराणसी और देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों और व्यक्तित्वों की जानकारी प्रदर्शित की जाएगी। इससे पर्यटकों और नई पीढ़ी को करखियांव के गौरवशाली इतिहास को समझने का अवसर मिलेगा।

11.5 हेक्टेयर में विकसित होगा स्मृति एवं पर्यटन परिसर

यूपी प्रोजेक्ट्स कारपोरेशन लिमिटेड, वाराणसी के परियोजना प्रबंधक मानवेन्द्र सिंह के अनुसार, यह पूरा परिसर करीब 11.5 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को सुरक्षित रखने के साथ ही यहां आधुनिक पर्यटन सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

सरकार की योजना करखियांव को ऐसा ऐतिहासिक और पर्यटन स्थल बनाने की है, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटक स्वतंत्रता आंदोलन में गांव के योगदान से परिचित हो सकें।

इको-टूरिज्म और झील आधारित पर्यटन भी होगा विकसित

परियोजना में केवल ऐतिहासिक स्मृतियों को संरक्षित करने पर ही जोर नहीं दिया गया है, बल्कि इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की योजना है। संयुक्त निदेशक पर्यटन दिनेश कुमार सिंह के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में परिसर में झील आधारित इको-टूरिज्म विकसित किया जाएगा।

करखियांव लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के नजदीक स्थित है। ऐसे में आने वाले समय में यह क्षेत्र वाराणसी के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है।

ओपन एम्फीथियेटर से जॉगिंग ट्रैक तक की सुविधाएं

स्वतंत्रता संग्राम सर्किट के इस परिसर में पर्यटकों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसमें ओपन एम्फीथियेटर, आकर्षक लैंडस्केपिंग, पौधारोपण, बच्चों के लिए खेल क्षेत्र, पाथवे और जॉगिंग ट्रैक शामिल हैं।

परिसर में आकर्षक प्रकाश व्यवस्था और साइनेज भी लगाए जाएंगे। इन सुविधाओं का उद्देश्य ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन की आधुनिक जरूरतों के अनुरूप विकसित करना है।

इतिहास और पर्यटन का बनेगा संगम

करखियांव का विकास केवल सौंदर्यीकरण की परियोजना नहीं है, बल्कि इसे इतिहास, संस्कृति और पर्यटन के संगम के रूप में विकसित करने की योजना है। म्यूरल पार्क, स्मृति स्तंभ और इंटरप्रिटेशन वाल के जरिए स्वतंत्रता आंदोलन के स्थानीय इतिहास को दृश्य रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

इससे खासकर युवा पीढ़ी को यह जानने का अवसर मिलेगा कि देश की आजादी की लड़ाई में स्थानीय स्तर पर आम लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों ने किस तरह योगदान दिया था।

स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर

परियोजना पूरी होने के बाद करखियांव में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हस्तशिल्प, खानपान, पर्यटन गाइड, स्थानीय परिवहन और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है।

इस तरह करखियांव आने वाले समय में स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत को संजोने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र भी बन सकता है।

स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत को मिलेगा नया आयाम

करखियांव में विकसित हो रहा फ्रीडम फाइटर मेमोरियल पार्क उन 26 सेनानियों के बलिदान और संघर्ष को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना योगदान दिया। स्वतंत्रता संग्राम सर्किट के रूप में विकसित होने के बाद यह स्थल वाराणसी के इतिहास और पर्यटन मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बना सकता है।

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