यूपी को केंद्र से सबसे ज्यादा बिजली आवंटन, 11,520 मेगावाट के साथ उत्तर प्रदेश शीर्ष पर

उत्तर प्रदेश को केंद्रीय क्षेत्र से सबसे अधिक बिजली आवंटित हुई है। 30 जून 2026 तक यूपी को 11,520.5 मेगावाट बिजली मिली, जबकि महाराष्ट्र को 9,025.2 मेगावाट। जानिए गाडगिल फार्मूले और बिजली आवंटन का पूरा मामला।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों के बीच प्रदेश को केंद्र सरकार से मिलने वाली बिजली में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। राज्यसभा में पेश केंद्रीय क्षेत्र से राज्यों को बिजली आवंटन के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक बिजली आवंटित की गई है। 30 जून 2026 तक प्रदेश को केंद्रीय विद्युत उत्पादन परियोजनाओं से 11,520.5 मेगावाट बिजली आवंटित हुई है।

केंद्रीय क्षेत्र से बिजली आवंटन के मामले में उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र समेत कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ दिया है। महाराष्ट्र को 30 जून 2026 तक 9,025.2 मेगावाट बिजली मिली। इस तरह यूपी को महाराष्ट्र की तुलना में 2,495.3 मेगावाट अधिक केंद्रीय बिजली आवंटित हुई।

गाडगिल फार्मूले का मिला लाभ

उत्तर प्रदेश को केंद्रीय क्षेत्र से सर्वाधिक बिजली मिलने के पीछे गाडगिल फार्मूले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़ी आबादी वाले राज्य के रूप में इस फार्मूले के तहत उत्तर प्रदेश को बिजली आवंटन में अधिक हिस्सेदारी का लाभ मिला है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने वर्ष 2008 में गाडगिल फार्मूले के आधार पर उत्तर प्रदेश को केंद्रीय क्षेत्र से बिजली आवंटित किए जाने का मुद्दा उठाया था। परिषद के पत्र के आधार पर तत्कालीन उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष विजय कुमार ने भी केंद्र सरकार को इस संबंध में पत्र भेजा था।

2008 में उठाया गया मुद्दा अब आया काम

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के मुताबिक, गाडगिल फार्मूले के तहत उत्तर प्रदेश को बिजली आवंटन के लिए वर्ष 2008 में शुरू की गई लड़ाई का लाभ अब प्रदेश को मिल रहा है। उनका कहना है कि पिछले चार-पांच वर्षों से उत्तर प्रदेश को केंद्रीय क्षेत्र से लगातार अधिक बिजली मिल रही है।

परिषद का मानना है कि आबादी, ऊर्जा खपत और अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी को उचित रूप से तय किया जाना चाहिए था। अब केंद्रीय बिजली आवंटन के ताजा आंकड़े प्रदेश की बढ़ती हिस्सेदारी को दर्शा रहे हैं।

चार साल में करीब 2,000 मेगावाट बढ़ी हिस्सेदारी

केंद्रीय परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश को मिलने वाली बिजली में पिछले कुछ समय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 31 मार्च 2025 को प्रदेश को 9,530.4 मेगावाट बिजली आवंटित थी। यह आंकड़ा 31 मार्च 2026 को बढ़कर 10,881.2 मेगावाट हो गया।

इसके बाद 30 जून 2026 तक केंद्रीय क्षेत्र से उत्तर प्रदेश का बिजली आवंटन 11,520.5 मेगावाट पहुंच गया। यानी 31 मार्च 2025 से 30 जून 2026 के बीच प्रदेश की केंद्रीय बिजली हिस्सेदारी में 1,990.1 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई।

महाराष्ट्र से करीब 2,500 मेगावाट ज्यादा बिजली

केंद्रीय बिजली आवंटन में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बीच अंतर भी काफी बढ़ गया है। 30 जून 2026 को यूपी को 11,520.5 मेगावाट बिजली आवंटित हुई, जबकि महाराष्ट्र को 9,025.2 मेगावाट।

इस तरह उत्तर प्रदेश को महाराष्ट्र की तुलना में 2,495.3 मेगावाट अधिक बिजली मिली। इससे केंद्रीय क्षेत्र से बिजली आवंटन में यूपी की स्थिति मजबूत हुई है।

गाडगिल फार्मूले में आबादी को 60 प्रतिशत भारांक

गाडगिल फार्मूले के तहत बिजली आवंटन में जनसंख्या को सबसे अधिक महत्व दिया गया है। इसमें 60 प्रतिशत भारांक जनसंख्या के लिए निर्धारित है। इसके अलावा प्रति व्यक्ति आय, चल रही सिंचाई और बिजली परियोजनाओं, राज्यों की विशेष समस्याओं तथा कर प्रयास के लिए 10-10 प्रतिशत भारांक निर्धारित किया गया है।

इसके साथ ही राज्यों में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुई ऊर्जा खपत को भी बिजली आवंटन निर्धारित करने के प्रमुख आधारों में शामिल किया जाता है।

प्रमुख राज्यों में यूपी की हिस्सेदारी सबसे अधिक

30 जून 2026 तक केंद्रीय क्षेत्र से प्रमुख राज्यों को आवंटित बिजली के आंकड़ों में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है।

राज्य31 मार्च 202531 मार्च 202630 जून 2026
उत्तर प्रदेश9,530.410,881.211,520.5
महाराष्ट्र8,955.29,059.89,025.2
बिहार7,572.28,557.58,559.0
मध्य प्रदेश7,244.57,668.27,655.3
गुजरात7,313.97,048.56,998.9

बढ़ती मांग के बीच यूपी को बड़ी राहत

उत्तर प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों, शहरीकरण, सिंचाई और घरेलू बिजली खपत में लगातार वृद्धि के कारण बिजली की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में केंद्रीय क्षेत्र से बढ़ा हुआ आवंटन प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो सकता है।

प्रदेश सरकार अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। इसके साथ केंद्रीय परियोजनाओं से मिलने वाली अतिरिक्त बिजली से बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि गाडगिल फार्मूले के तहत आबादी और ऊर्जा खपत जैसे मानकों का उचित लाभ उत्तर प्रदेश को मिलना चाहिए। ताजा आंकड़ों से संकेत मिलता है कि लंबे समय से उठाया जा रहा यह मुद्दा अब प्रदेश के पक्ष में परिणाम दे रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button