‘पूरी अर्थव्यवस्था हो जाएगी तबाह’, सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की दुनिया से गुहार

सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है। पाक नेताओं ने चेतावनी दी है कि पानी की आपूर्ति प्रभावित होने पर देश की अर्थव्यवस्था और कृषि व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

इस्लामाबाद/नई दिल्ली। सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचने की कोशिश की है। पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओं ने इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में जल आपूर्ति और आर्थिक प्रभाव को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं।

पाकिस्तान के नेताओं का कहना है कि देश की कृषि, सिंचाई व्यवस्था और अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर करता है। ऐसे में जल प्रवाह में किसी भी प्रकार की कमी का सीधा असर खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।

पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांगा सहयोग

कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के नेताओं ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों का सम्मान किया जाना चाहिए और पानी को राजनीतिक विवादों का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि सिंधु जल संधि दशकों से दोनों देशों के बीच स्थिरता का आधार रही है।

पाकिस्तान की ओर से यह भी कहा गया कि जल संकट की स्थिति बनने पर इसके व्यापक आर्थिक और सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं।

कृषि और अर्थव्यवस्था पर असर की आशंका

विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान की बड़ी आबादी और कृषि क्षेत्र सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर हैं। गेहूं, चावल, कपास और गन्ने जैसी प्रमुख फसलों की सिंचाई का बड़ा हिस्सा इन्हीं जल स्रोतों से होता है। ऐसे में जल उपलब्धता में कमी से कृषि उत्पादन और निर्यात प्रभावित हो सकते हैं।

भारत का रुख

भारत की ओर से इस मुद्दे पर पहले यह कहा जा चुका है कि सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए नीतिगत फैसले लिए गए हैं। भारत का कहना है कि क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान आवश्यक है।

क्या है सिंधु जल संधि?

सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई थी। इस समझौते के तहत पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज के जल उपयोग का अधिकार भारत को मिला, जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब के उपयोग का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया।

यह समझौता दशकों तक दोनों देशों के बीच जल बंटवारे का आधार बना रहा और कई राजनीतिक तथा सैन्य तनावों के बावजूद लागू रहा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह समझौता?

सिंधु जल संधि को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों में गिना जाता है। दक्षिण एशिया की खाद्य सुरक्षा, कृषि अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से यह संधि महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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