“CM योगी आदित्यनाथ के रायबरेली दौरे से पहले शहर में उनके खिलाफ विवादित पोस्टर लगाए गए। पोस्टरों पर समाजवादी छात्रसभा रायबरेली का नाम लिखा था। प्रशासन ने सुबह सभी पोस्टर हटवा दिए।“
रायबरेली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सोमवार को रायबरेली दौरे से पहले शहर में विवादित पोस्टर लगाए जाने से सियासी हलचल तेज हो गई। रविवार देर रात शहर के कई चौराहों, डस्टबिन और दीवारों पर मुख्यमंत्री के खिलाफ पोस्टर चस्पा किए गए। पोस्टरों पर ‘समाजवादी छात्रसभा रायबरेली’ लिखा हुआ था।
पोस्टरों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से वापस जाने की अपील करते हुए प्रदेश सरकार पर कई आरोप लगाए गए। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सुबह तक पोस्टर हटवा दिए।
पोस्टरों पर लगाए गए सरकार पर कई आरोप
शहर में लगाए गए पोस्टरों पर लिखा था- ‘रायबरेली के युवाओं को बेरोजगारी देने वाले, प्राइमरी स्कूलों को बंद करने वाले, टूटी सड़कें देने वाले, उद्योग-धंधों से वंचित रखने वाले वापस जाओ।’
पोस्टरों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक राजनीतिक संदेश लिखे गए थे। मुख्यमंत्री के दौरे से कुछ घंटे पहले इस तरह की पोस्टरबाजी से प्रशासन में भी हड़कंप मच गया।
किसने लगाए पोस्टर? नहीं सामने आया नाम
सबसे अहम सवाल यह है कि आखिर ये पोस्टर किसने लगाए? पोस्टरों पर समाजवादी छात्रसभा का नाम जरूर लिखा है, लेकिन संगठन की ओर से इसकी जिम्मेदारी नहीं ली गई है।
समाजवादी छात्रसभा के जिलाध्यक्ष शुभम यादव लोहिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। वहीं, सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव ने कहा कि समाजवादी छात्रसभा उनकी पार्टी की छात्र इकाई है और उसके जिलाध्यक्ष शुभम यादव लोहिया हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ रात में पोस्टर लगाए जाने की जानकारी उन्हें मिली है, लेकिन पोस्टर किसने लगाए, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
प्रशासन ने सुबह तक हटवा दिए पोस्टर
मामले में सिटी मजिस्ट्रेट राम अवतार ने बताया कि पुलिस को पोस्टर लगाए जाने की जानकारी मिली थी। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सुबह तक सभी पोस्टर हटवा दिए।
सिटी मजिस्ट्रेट ने कहा कि सरकारी कार्यक्रम के दौरान इस तरह की मानसिकता के साथ पोस्टर लगाना उचित नहीं है। प्रशासन की ओर से मामले पर नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था के बीच पोस्टरबाजी से उठे सवाल
मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए रायबरेली में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में शहर के प्रमुख स्थानों पर रातोंरात पोस्टर लग जाने से सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रशासन की ओर से पोस्टर हटाए जाने के बाद अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन्हें किसने लगाया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी तक किसी व्यक्ति या संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।
879 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को रायबरेली में 879 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 346 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। कार्यक्रम का आयोजन फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज मैदान में किया जा रहा है।
इन परियोजनाओं में रायबरेली, बछरावां और हरचंदपुर विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े विकास कार्य शामिल हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सिंचाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं को कार्यक्रम के दौरान गति दी जाएगी।
लाभार्थियों को 19 करोड़ रुपये की DBT राशि
मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT के माध्यम से करीब 19 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की जाएगी।
इसके अलावा लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड, लैपटॉप, स्वीकृति पत्र और आवास की चाबियां भी वितरित की जाएंगी। सपेरा समुदाय के 60 से अधिक परिवारों समेत अन्य आवासविहीन परिवारों को आवासीय पट्टे के आवंटन पत्र भी दिए जाने हैं।
विकास कार्यक्रम से पहले सियासी विवाद
एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रायबरेली में करोड़ों रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने पहुंच रहे हैं, वहीं उनके दौरे से पहले लगाए गए विवादित पोस्टरों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।
फिलहाल प्रशासन ने पोस्टर हटवा दिए हैं, लेकिन उन्हें लगाने वाले कौन थे और क्या वास्तव में समाजवादी छात्रसभा का इससे कोई संबंध है, यह सवाल अभी भी बना हुआ है।
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