“One Nation One Election: कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने दावा किया है कि संसद से ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल पास होने के बावजूद 2029 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ नहीं हो सकते। उन्होंने प्रस्तावित कानून को संविधान की मूल भावना के विपरीत बताया।“
नई दिल्ली। ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ यानी देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की केंद्र सरकार की पहल को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने मंगलवार को दावा किया कि संसद से प्रस्तावित बिल पारित हो जाने के बावजूद 2029 में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराना संभव नहीं होगा। चिदंबरम ने इसके पीछे प्रस्तावित कानून में शामिल ‘अपॉइंटेड डेट’ के प्रावधान को आधार बनाया है।
चिदंबरम ने कहा कि वह ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ प्रस्ताव की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के सामने अपनी राय रख चुके हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने समिति के सामने कहा है कि यह विधेयक संघीय ढांचे वाले संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना और संविधान की मूल विशेषताओं के खिलाफ है।
‘2029 में एक साथ चुनाव संभव नहीं’
पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि जेपीसी के अध्यक्ष की ओर से 2029 में एक साथ चुनाव कराए जाने की संभावना को लेकर दिए गए बयान से वह सहमत नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि यह राय प्रस्तावित विधेयक के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।
कांग्रेस नेता के मुताबिक, अगर संसद से यह बिल पारित भी हो जाता है, तब भी प्रस्तावित कानून के तहत ‘अपॉइंटेड डेट’ सामान्य चुनाव के बाद की तारीख ही हो सकती है। चिदंबरम ने तर्क दिया कि अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है, इसलिए उसी वर्ष लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की व्यवस्था लागू नहीं की जा सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि बिल के पारित होने की संभावना उन्हें कम नजर आती है। चिदंबरम ने प्रस्तावित चुनाव सुधार को लेकर विपक्ष की ओर से देशव्यापी अभियान चलाने की बात भी कही है।
संविधान की मूल भावना पर उठाए सवाल
चिदंबरम ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ व्यवस्था पर संवैधानिक सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि भारत जैसे संघीय देश में संसदीय लोकतंत्र की मूल विशेषताओं को ध्यान में रखना जरूरी है। कांग्रेस नेता का आरोप है कि प्रस्तावित विधेयक संविधान की मूल विशेषताओं को प्रभावित करता है।
उनके अनुसार, विपक्षी दल इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाएंगे और प्रस्तावित कानून के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाएंगे। कांग्रेस लंबे समय से लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की योजना का विरोध करती रही है।
जेपीसी में चुनाव टालने के प्रावधान पर भी सुझाव
इसी बीच ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े विधेयकों की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति की सोमवार को हुई बैठक में चुनाव टालने के प्रावधानों को लेकर भी सुझाव दिए गए। सूत्रों के मुताबिक, दो सार्वजनिक नीति संस्थानों ने समिति के सामने विधानसभा चुनावों को टालने के लिए स्पष्ट और परिभाषित आधार तय करने का सुझाव दिया।
संस्थानों ने कहा कि चुनाव स्थगित करने के संबंध में किसी तरह के व्यक्तिपरक विवेक की जगह ऐसे स्पष्ट आधार होने चाहिए, जिनकी न्यायिक समीक्षा संभव हो। इसके साथ ही चुनाव टालने की स्थिति में अधिकतम समय-सीमा तय करने की भी बात कही गई।
2024 में लोकसभा में पेश हुए थे दोनों विधेयक
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ व्यवस्था लागू करने के लिए संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 को लोकसभा में 17 दिसंबर 2024 को पेश किया गया था। इसके बाद दोनों विधेयकों को विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया।
प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराना है। इसके समर्थकों का तर्क है कि इससे बार-बार होने वाले चुनावों पर खर्च कम होगा और चुनावी प्रक्रिया के दौरान लागू होने वाली आचार संहिता के कारण विकास कार्यों में आने वाली रुकावट कम हो सकती है।
वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि एक साथ चुनाव कराने की व्यवस्था राज्यों की स्वायत्तता और संघीय ढांचे को प्रभावित कर सकती है। सरकार और विपक्ष के बीच इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक बहस जारी है।
जेपीसी कर चुकी है कई बैठकें
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़े विधेयकों की जांच कर रही जेपीसी अब तक कई बैठकें कर चुकी है। समिति ने इस विषय पर विशेषज्ञों और विभिन्न पक्षों से सुझाव लिए हैं। समिति ने अलग-अलग स्थानों का अध्ययन दौरा भी किया है। उसका सबसे हालिया अध्ययन दौरा जुलाई में लखनऊ का रहा था।
अब चिदंबरम के 2029 में एक साथ चुनाव संभव नहीं होने के दावे के बाद ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं। अंतिम तस्वीर संसद में विधेयकों पर होने वाली चर्चा और उनके पारित होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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