“दिल्ली के सैदुलअजाइब स्थित साकेत मेट्रो स्टेशन के पास पांच मंजिला इमारत ढहने के मामले में MCD के JE अमन जैन और AE सुदेश सिंह चौहान को निलंबित कर दिया गया है। हादसे में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। CM रेखा गुप्ता ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।“
नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सैदुलअजाइब इलाके में साकेत मेट्रो स्टेशन के निकट पांच मंजिला इमारत ढहने के मामले में दिल्ली सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। हादसे में अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई घायल अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम (एमसीडी) के दो अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार सुबह घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
एमसीडी के जेई और एई पर गिरी गाज
हादसे के बाद प्रारंभिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करते हुए एमसीडी के जूनियर इंजीनियर (जेई) अमन जैन और असिस्टेंट इंजीनियर (एई) सुदेश सिंह चौहान को निलंबित कर दिया गया है। माना जा रहा है कि भवन की स्थिति और निर्माण संबंधी अनियमितताओं की निगरानी में लापरवाही के चलते यह कार्रवाई की गई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे और अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
चार लोगों की मौत, कई घायल
शनिवार देर रात हुए इस दर्दनाक हादसे में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों में तीन की पहचान रवि, नलिन और कपिल के रूप में हुई है, जबकि चौथे मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है।
बताया जा रहा है कि रवि ने किर्गिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी और वर्तमान में पीजी प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। हादसे के समय वह अपने दोस्तों के साथ कैंटीन में भोजन करने गए थे। अचानक इमारत ढहने से वह मलबे में दब गए और उनकी मौत हो गई।
घटना में घायल कई लोगों का उपचार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) सहित विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
घटनास्थल पर पहुंचीं मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार सुबह घटनास्थल का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए सभी संसाधनों का उपयोग किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
घटना की निष्पक्ष जांच के लिए जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच टीम हादसे के कारणों, निर्माण की वैधता, सुरक्षा मानकों के पालन और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की पड़ताल करेगी।
सरकार ने जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं ताकि दोषियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सके।
जर्जर और अवैध इमारतों पर चलेगा अभियान
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राजधानी में स्थित जर्जर, खतरनाक और अवैध निर्माण वाली इमारतों की व्यापक जांच करने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जोखिमपूर्ण भवनों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
दिल्ली नगर निगम, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन को संयुक्त रूप से सर्वेक्षण अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
राहत-बचाव अभियान जारी
घटनास्थल पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दमकल विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। मलबे को हटाने का काम जारी है और आशंका के मद्देनजर आसपास के क्षेत्रों को भी सुरक्षा घेरे में लिया गया है।
प्रशासन का कहना है कि जब तक पूरी तरह से यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि मलबे में कोई व्यक्ति फंसा नहीं है, तब तक बचाव अभियान जारी रहेगा।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे ने राजधानी में भवन सुरक्षा मानकों और अवैध निर्माण की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में कई बहुमंजिला इमारतें नियमों की अनदेखी कर बनाई गई हैं, जिनकी समय-समय पर जांच नहीं होती।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भवन निर्माण और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए तो भविष्य में इस प्रकार की त्रासदियों को रोका जा सकता है।
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