NCR में पुराने वाहनों पर कार्रवाई में लापरवाही पड़ी भारी, 13 अफसरों पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश के NCR जिलों में पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई में लापरवाही पर 13 परिवहन अधिकारियों को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। अधिकारियों को रोजाना करीब 500 End of Life वाहनों पर कार्रवाई का लक्ष्य दिया गया था।

लखनऊ: पुराने वाहनों पर कार्रवाई में लापरवाही पर सख्त एक्शन

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों के खिलाफ अभियान में अपेक्षित कार्रवाई नहीं करने पर उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। अभियान की प्रगति रिपोर्ट खराब मिलने और निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप प्रवर्तन कार्रवाई नहीं करने पर 13 जिलों के 13 प्रवर्तन अधिकारियों को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है।

यह कार्रवाई परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन की ओर से की गई है। विभाग के इस कदम से NCR क्षेत्र में पुराने और उम्र पूरी कर चुके वाहनों के खिलाफ अभियान को लेकर अधिकारियों में हड़कंप मचा है।

रोजाना 500 वाहनों पर कार्रवाई का था लक्ष्य

NCR में End of Life (EOL) वाहनों को सड़कों से हटाने के लिए प्रत्येक जिले में प्रतिदिन करीब 500 वाहनों को सीज करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके तहत 10 वर्ष से अधिक पुराने डीजल और 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

निर्देशों में ऐसे वाहनों को बंद करने के साथ अधिकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा केंद्र यानी RVSF के माध्यम से स्क्रैप कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया था।

समीक्षा में सामने आई बेहद कम कार्रवाई

परिवहन आयुक्त के मुताबिक, 13 मार्च को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की 24वीं बैठक में NCR में End of Life वाहनों को बंद करने और अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर के जरिए उन्हें स्क्रैप किए जाने को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए थे।

इसके बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में NCR क्षेत्र में पुराने वाहनों के खिलाफ हुई कार्रवाई की स्थिति देखी गई। समीक्षा के दौरान सामने आया कि पूरे NCR क्षेत्र में केवल 666 वाहनों को ही बंद किया गया

निर्धारित लक्ष्य की तुलना में कार्रवाई का यह आंकड़ा बेहद कम पाया गया। इसके बाद संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे और लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय की गई।

इन 13 अफसरों को मिली विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि

विभाग की कार्रवाई की जद में NCR क्षेत्र के 13 जिलों के 13 प्रवर्तन अधिकारी आए हैं। इनमें—

  • सुधांशु रंजन, एआरटीओ प्रवर्तन, प्रथम दल मेरठ
  • विपिन कुमार, एआरटीओ प्रवर्तन, बागपत
  • अमित राजन राय, एआरटीओ प्रवर्तन, प्रथम दल गाजियाबाद
  • अंकिता शुक्ला, एआरटीओ प्रवर्तन, द्वितीय दल गाजियाबाद
  • आकांक्षा सिंह पटेल, एआरटीओ प्रवर्तन, तृतीय दल गाजियाबाद
  • विनीत कुमार मिश्र, एआरटीओ प्रवर्तन, चतुर्थ दल गाजियाबाद
  • नीतू शर्मा, एआरटीओ प्रवर्तन, द्वितीय दल बुलंदशहर
  • अभिषेक कनौजिया, एआरटीओ प्रवर्तन, प्रथम दल गौतमबुद्धनगर
  • उदित नारायण, एआरटीओ प्रवर्तन, द्वितीय दल गौतमबुद्धनगर
  • नंद कुमार, एआरटीओ प्रवर्तन, तृतीय दल गौतमबुद्धनगर
  • रमेश कुमार चौबे, एआरटीओ प्रवर्तन, हापुड़
  • अजय मिश्र, एआरटीओ प्रशासन/प्रवर्तन, मुजफ्फरनगर
  • प्रवेश कुमार, एआरटीओ प्रशासन/प्रवर्तन, शामली

शामिल हैं।

पुराने वाहनों से प्रदूषण रोकने की कवायद

NCR में पुराने वाहनों पर कार्रवाई का सीधा संबंध वायु प्रदूषण नियंत्रण से है। उम्र पूरी कर चुके पुराने वाहन अधिक प्रदूषण फैलाने वाले माने जाते हैं। ऐसे वाहनों को सड़कों से हटाकर अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर भेजने की नीति के तहत परिवहन विभाग को लगातार प्रवर्तन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

खास तौर पर 10 वर्ष से अधिक पुराने डीजल और 15 वर्ष से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों पर कार्रवाई को प्राथमिकता दी जा रही है।

अधिकारियों को अब अभियान तेज करने के निर्देश

समीक्षा में कार्रवाई की स्थिति बेहद कमजोर पाए जाने के बाद परिवहन विभाग ने अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है। विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि को गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई माना जाता है और इससे संबंधित अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

सरकार की कोशिश है कि NCR में पुराने वाहनों के खिलाफ अभियान केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि सड़कों पर भी प्रभावी कार्रवाई दिखाई दे। आने वाले दिनों में अभियान की प्रगति और वाहनों की सीजिंग व स्क्रैपिंग की संख्या पर विभाग की निगरानी और सख्त होने की संभावना है।

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