“मनुस्मृति पर राहुल गांधी की टिप्पणी के बाद प्रयागराज के धर्माचार्यों में रोष है। संत श्रद्धालुओं से संवाद कर मनुस्मृति को लेकर फैली भ्रांतियां दूर करने में जुटे हैं।“
प्रयागराज। मनुस्मृति पर राहुल गांधी के बयान को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए कहा था कि महिलाओं को दबाने की मानसिकता मनुस्मृति से आती है। उनके इस बयान पर प्रयागराज के कई धर्माचार्यों ने नाराजगी जताई है।
धर्माचार्यों का कहना है कि मनुस्मृति पर राहुल गांधी का बयान ग्रंथ की गलत व्याख्या पर आधारित है। इसी के चलते प्रयागराज के मठ-मंदिरों और आश्रमों में श्रद्धालुओं से संवाद कर मनुस्मृति के कथित मूल भाव को समझाने का अभियान शुरू किया गया है।
मठ-मंदिरों में श्रद्धालुओं से संवाद
श्रीमनकामेश्वर महादेव मंदिर, मां आलोपशंकरी मंदिर, कैवल्य धाम आश्रम और श्रीमहानिर्वाणी अखाड़े से जुड़े संत इस मुद्दे पर श्रद्धालुओं से चर्चा कर रहे हैं। इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों पर भी मनुस्मृति से जुड़े विभिन्न संदर्भ साझा किए जा रहे हैं।
श्रीमनकामेश्वर महादेव मंदिर के महंत और द्वारका शारदा पीठ के प्रतिनिधि श्रीधरानंद ब्रह्मचारी ने सुबह और शाम धार्मिक संवाद शुरू किया है। इसमें श्रद्धालुओं को मनुस्मृति सहित वेद-पुराण से जुड़े सवाल पूछने और उनके भाव को समझने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।
‘मनुस्मृति में नारी सम्मान की बात’
श्रीधरानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि मनुस्मृति को लेकर लोगों में भ्रांतियां बढ़ रही हैं। उनके अनुसार, ग्रंथ को महिला विरोधी बताना सही नहीं है। उन्होंने नारी के सम्मान से जुड़े श्लोकों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस परिवार में बहू-बेटियों को कष्ट होता है, उसका पतन होता है, जबकि जहां महिलाएं सुखी रहती हैं, वहां परिवार की उन्नति होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए मनुस्मृति और श्रीरामचरितमानस के भाव को बदलकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है।
‘राजनीतिक प्रयोग के लिए क्या सिर्फ सनातन धर्म है?’
श्रीमहानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत यमुना पुरी ने भी राहुल गांधी के बयान पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या करना उचित नहीं है।
उनका कहना है कि ऋषि मनु ने समाज को व्यवस्थित करने और एकता के सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से मनुस्मृति की रचना की थी। उन्होंने भी मनुस्मृति में नारी सम्मान की बात होने का दावा किया।
रवींद्र पुरी ने राहुल गांधी के बयान को बताया निंदनीय
मां मनसादेवी मंदिर और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने राहुल गांधी के बयान की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति को राजनीतिक लाभ के लिए विवादित बनाना उचित नहीं है।
रवींद्र पुरी ने कहा कि लोगों को मनुस्मृति का सही भाव समझाने की जरूरत है। उन्होंने कथावाचकों से भी प्रवचन के दौरान मनुस्मृति की सही व्याख्या श्रद्धालुओं के सामने रखने का आग्रह किया।
‘राहुल गांधी मनुस्मृति के अध्याय-3 का अध्ययन करें’
विश्व पुरोहित परिषद के अध्यक्ष डॉ. बिपिन पांडेय ने राहुल गांधी से मनुस्मृति के अध्याय-3 का अध्ययन करने की अपील की। उन्होंने नारी सम्मान से जुड़े श्लोक का हवाला देते हुए कहा कि जहां महिलाओं का सम्मान होता है, वहां देवताओं के प्रसन्न होने की बात कही गई है।
डॉ. बिपिन पांडेय के अनुसार, मनुस्मृति जैसे प्राचीन ग्रंथ के बारे में टिप्पणी करने से पहले उसके संदर्भ और मूल भाव को समझना आवश्यक है।
“देश-दुनिया से जुड़े राजनीतिक, मनोरंजन और खेल और सामयिक घटनाक्रम की विस्तृत और सटीक जानकारी के लिए ‘राष्ट्रीय प्रस्तावना’ के साथ जुड़े रहें। ताज़ा खबरों, चुनावी बयानबाज़ी और विशेष रिपोर्ट्स के लिए हमारे साथ बने रहें।”






