“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रगति की 53वीं बैठक में नौ राज्यों की 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक की छह अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की। बैठक में डिजिटल अरेस्ट और साइबर धोखाधड़ी रोकने के उपायों पर भी चर्चा हुई।“
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को प्रगति की 53वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए नौ राज्यों में चल रही 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली छह प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की। इन परियोजनाओं का संबंध रेलवे, सड़क और बिजली जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से है। प्रधानमंत्री ने परियोजनाओं में देरी पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे केवल लागत ही नहीं बढ़ती, बल्कि लोगों, उद्योगों और पूरी अर्थव्यवस्था को समय पर मिलने वाला लाभ भी प्रभावित होता है।
परियोजनाओं को टुकड़ों में नहीं, समग्र रूप से देखने पर जोर
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने अधिकारियों और राज्य सरकारों को बड़ी परियोजनाओं को अलग-अलग पैकेज या हिस्सों में देखने के बजाय उन्हें समग्र परियोजना के रूप में देखने और उसी आधार पर निगरानी करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग हिस्सों में काम पूरा होने के बावजूद अंतिम लक्ष्य पूरी परियोजना को समय पर पूरा करके जनता के लिए शुरू करना होना चाहिए। इसके लिए मंत्रालयों और राज्यों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली महत्वपूर्ण अड़चनों की शुरुआत से ही पहचान कर उन्हें दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने केंद्र और राज्य सरकारों में सक्रिय कार्य संस्कृति विकसित करने के साथ परियोजनाओं के प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने पर भी जोर दिया।
परिवहन परियोजनाओं में साझा गलियारे पर जोर
पीएम मोदी ने बड़ी परिवहन और अवसंरचना परियोजनाओं की योजना बनाते समय जहां संभव हो, वहां विभिन्न सेवाओं के लिए साझा गलियारे विकसित करने पर विचार करने की बात कही। इससे भविष्य में अलग-अलग परियोजनाओं के लिए बार-बार निर्माण कार्य करने की जरूरत कम हो सकती है और समय व संसाधनों की बचत की जा सकती है।
प्रधानमंत्री ने बैठक के बाद इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी कहा कि नौ राज्यों में रेलवे, सड़क और बिजली क्षेत्रों से संबंधित 30 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं की समीक्षा की गई। सरकार का जोर बेहतर कनेक्टिविटी, तेज विकास, बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और परियोजनाओं में देरी कम करने पर है।
डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर भी हुई चर्चा
प्रगति बैठक में सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की ही समीक्षा नहीं हुई। प्रधानमंत्री ने साइबर धोखाधड़ी और डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर भी चर्चा की। उन्होंने ऐसे अपराधों से लोगों को बचाने के लिए लगातार प्रशिक्षण, जागरूकता और शिक्षा पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और अन्य संवेदनशील वर्गों के लिए लक्षित जन-जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया। लोगों को साइबर ठगी के सामान्य तरीकों, संभावित खतरे के संकेतों और डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में लगातार जानकारी देने की आवश्यकता बताई गई।
साइबर अपराध रोकने के लिए कर्मियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर
पीएम मोदी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के नियमित क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका कहना था कि साइबर अपराध के तरीके लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में कानून-व्यवस्था और संबंधित विभागों में काम करने वाले कर्मियों को नए तौर-तरीकों की पहचान करने और समय पर कार्रवाई करने के लिए लगातार प्रशिक्षित किया जाना जरूरी है।
डिजिटल कृषि मिशन और एग्रीस्टैक की भी समीक्षा
बैठक में डिजिटल कृषि मिशन के तहत एग्रीस्टैक की भी समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) समेत आधुनिक डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल केवल एक स्तर तक सीमित न रहकर बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों की योजना बनाने से लेकर उपज के प्रसंस्करण तक पूरी प्रक्रिया में किया जाना चाहिए। इससे किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों के लिए बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
समय पर पूरी हों परियोजनाएं, तभी मिलेगा पूरा लाभ
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी बड़ी परियोजना की सफलता केवल निर्माण के अलग-अलग चरण पूरे करने से नहीं, बल्कि उसे समय पर पूरा कर जनता के उपयोग में लाने से तय होती है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों के बीच बेहतर समन्वय, जिम्मेदारी तय करने और लगातार निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने पर बैठक में विशेष जोर दिया गया।
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