“नयनतारा ने फिल्म ‘टॉक्सिक’ में अपने किरदार, मल्टी-स्टारर फिल्मों और फिल्मों की सफलता को लेकर अपने अनुभव साझा किए। अभिनेत्री ने कहा कि फिल्म बनाते समय महसूस होने वाली भावनाएं दर्शकों की प्रतिक्रिया में हमेशा उसी तरह तब्दील नहीं होतीं।“
हैदराबाद: साउथ सिनेमा की लेडी सुपरस्टार नयनतारा दो दशक से अधिक समय से अपनी दमदार अदाकारी और अलग-अलग तरह के किरदारों के लिए जानी जाती हैं। 80 से अधिक फिल्मों में काम कर चुकीं अभिनेत्री हाल ही में फिल्म ‘टॉक्सिक’ में गंगा के किरदार में नजर आईं। फिल्म में यश मुख्य भूमिका में हैं, जबकि कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया, हुमा कुरैशी और रुक्मिणी वसंत भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।
मल्टी-स्टारर फिल्म में अपने किरदार को लेकर नयनतारा का कहना है कि वह किसी फिल्म को इस आधार पर नहीं चुनतीं कि उसमें उनका स्क्रीन टाइम कितना है। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि किरदार कहानी में कितना सार्थक योगदान देता है।
स्क्रीन स्पेस से ज्यादा किरदार की अहमियत
नयनतारा ने कहा कि उन्होंने कभी फिल्मों को सोलो या मल्टी-स्टारर के नजरिए से नहीं देखा। अगर कहानी उन्हें उत्साहित करती है और किरदार का अपना उद्देश्य है, तो वह फिल्म का हिस्सा बनने के लिए तैयार रहती हैं।
अभिनेत्री के मुताबिक, सिनेमा एक सामूहिक माध्यम है और अगर फिल्म में हर किरदार अच्छी तरह लिखा गया हो तो उसका फायदा कलाकारों के साथ-साथ दर्शकों को भी मिलता है। ‘टॉक्सिक’ में गंगा का किरदार भी उनके लिए ऐसा ही था, जिसे वह नजरअंदाज नहीं कर सकीं।
गंगा को बताया मजबूत और भावनात्मक किरदार
‘टॉक्सिक’ में अपने किरदार गंगा के बारे में नयनतारा ने कहा कि वह उससे काफी जुड़ाव महसूस करती हैं। उनके अनुसार गंगा एक मजबूत और बेबाक महिला है, लेकिन उसकी ताकत केवल उसके आक्रामक व्यवहार में नहीं है।
नयनतारा ने बताया कि गंगा के व्यक्तित्व में उसके जीवन के अनुभव, उसके फैसले और मुश्किल परिस्थितियों में मजबूती से खड़े रहने की क्षमता दिखाई देती है। अभिनेत्री का मानना है कि वास्तविक मजबूती हमेशा शोर मचाकर या खुद को साबित करके दिखाने की जरूरत नहीं होती।
‘मुझे ऐसी महिलाओं का किरदार पसंद है’
नयनतारा ने कहा कि वह ऐसे महिला किरदारों की ओर आकर्षित होती हैं, जिनमें ताकत के साथ-साथ संवेदनशीलता और भावनात्मक गहराई भी हो। उनके मुताबिक, एक महिला एक ही समय में मजबूत, भावुक और शक्तिशाली हो सकती है।
अभिनेत्री ने कहा कि कई मायनों में वह खुद भी इन भावनाओं से जुड़ाव महसूस करती हैं। जिंदगी से मिलने वाले अनुभव यह सिखाते हैं कि हर बार अपनी ताकत का ऐलान करना जरूरी नहीं होता।
दो दशक के अनुभव से विकसित हुआ फिल्म को परखने का अंदाज
नयनतारा पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से कैमरे के सामने सक्रिय हैं। अभिनय के साथ उन्होंने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रखा है। वर्ष 2023 में उन्होंने गुजराती फिल्म ‘शुभ यात्रा’ के जरिए प्रोडक्शन से जुड़ी अपनी पारी शुरू की।
लंबे अभिनय अनुभव और निर्माता के तौर पर काम करने के कारण अब वह किसी फिल्म की संभावनाओं को लेकर एक तरह की सहज समझ विकसित होने की बात कहती हैं। हालांकि, उनका मानना है कि सिनेमा को पूरी तरह पहले से आंकना संभव नहीं है।
‘फिल्म बनाते समय हमारी भावना दर्शकों तक हमेशा नहीं पहुंचती’
नयनतारा के मुताबिक, वर्षों के अनुभव से फिल्म को लेकर एक अंदाजा जरूर विकसित होता है कि वह किस दिशा में जा सकती है, लेकिन सिनेमा भावनात्मक और अप्रत्याशित माध्यम है। फिल्म बनाते समय कलाकारों और टीम को जो महसूस होता है, जरूरी नहीं कि रिलीज के बाद दर्शक भी उसी तरह प्रतिक्रिया दें।
उन्होंने अपने करियर के उदाहरण देते हुए बताया कि कुछ फिल्मों को लेकर उन्हें पूरा भरोसा था, लेकिन वे उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकीं। वहीं कुछ ऐसी फिल्मों को लेकर उन्हें संदेह था, जिन्होंने बाद में बड़ी सफलता हासिल की।
नयनतारा ने ‘नानुम राउडी धान’, ‘कोलामावु कोकिला’ और ‘राजा रानी’ जैसी फिल्मों का जिक्र करते हुए कहा कि समय के साथ उन्होंने सफलता और असफलता दोनों को समान विनम्रता के साथ स्वीकार करना सीखा है।
आने वाले दिनों में कई बड़े प्रोजेक्ट
‘टॉक्सिक’ के बाद नयनतारा तमिल फिल्म ‘Hi’ में कविन के साथ नजर आएंगी। इसके अलावा उनके पास ‘मूक्कुथी अम्मन 2’, ‘मन्नांगट्टी Since 1960’, ‘डियर स्टूडेंट्स’ और ‘रक्कायी’ जैसे कई प्रोजेक्ट हैं।
नयनतारा का कहना है कि फिल्म की सफलता को लेकर अनुभव से अनुमान लगाया जा सकता है, लेकिन अंतिम फैसला हमेशा दर्शकों के हाथ में होता है। यही अनिश्चितता सिनेमा को खास और रोमांचक बनाती है।
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